Haryana News: हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), छुआछूत और जातिवाद के मुद्दों पर अपनी बात रखी। इसके साथ ही उन्होंने हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल और निजी कंपनी को बिजली देने से जुड़े नियामक के आदेश पर भी सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। विज ने कहा कि बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का रास्ता छोड़कर विभाग के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई की तैयारी में सहयोग करना चाहिए।
राहुल गांधी ने RSS को संविधान विरोधी पुरुषों का संगठन बताते हुए महिलाओं को लेकर भी टिप्पणी की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल विज ने कहा कि राहुल गांधी पहले भी इस तरह की बातें कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी वास्तव में RSS के बारे में जानते हैं और क्या कभी उन्होंने संघ की शाखा में जाकर वहां की गतिविधियों और प्रशिक्षण को समझने की कोशिश की है। विज ने कहा कि यदि राहुल गांधी को RSS के बारे में जानना है, तो उन्हें संघ की शाखा में जाना चाहिए और वहां जाकर समझना चाहिए कि क्या सिखाया जाता है।
छुआछूत और जातिवाद पर खड़गे के बयान पर क्या बोले विज?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि छुआछूत के कारण हिंदू धर्म खत्म होने की कगार पर है। उन्होंने देश में जातिवाद बने रहने और उत्तराखंड में एक भाषण स्थल को दो दिन बाद धोकर साफ किए जाने का भी जिक्र किया था। खड़गे के बयान पर अनिल विज ने कहा कि छुआछूत अब बीते समय की बात हो गई है। उनके मुताबिक, लोग भारतीय बनकर जी रहे हैं और सभी को भारतीय बनकर ही रहना चाहिए।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर अनिल विज का बयान
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरों के बीच ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि विभाग की ओर से बिजली व्यवस्था संभालने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने हड़ताल को बेवजह बताते हुए कहा कि विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के जरिए निकाला जाना चाहिए। विज के अनुसार, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने एक निजी कंपनी को बिजली देने का आदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने किसी निजी कंपनी को बुलाकर बिजली लेने के लिए आवेदन नहीं मांगा था। हालांकि, केंद्रीय कानून के तहत कोई भी व्यक्ति या कंपनी आवेदन देकर बिजली की मांग कर सकती है।
निजीकरण के खिलाफ हैं अनिल विज
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वह खुद बिजली विभाग के निजीकरण के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने तर्क दिया कि बिजली व्यवस्था के बुनियादी ढांचे पर सरकार का काफी पैसा लगा हुआ है और विभाग में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की सेवाओं और विभाग के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
विज ने कहा कि नियामक का आदेश विभाग के खिलाफ आया है और सरकार इसके खिलाफ अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि अपील करने के लिए 45 दिन का समय है और विभाग की ओर से पांच से छह दिन के भीतर अपील दायर करने की तैयारी की जा रही है। सरकार की कोशिश है कि नियामक के आदेश पर जल्द रोक यानी स्टे हासिल किया जा सके।