
HARYANA NEWS: हरियाणा के बराड़ा में माता बाला सुंदरी मंदिर मुलाना में हर वर्ष मकर संक्रांति के पावन अवसर पर एक अनोखी और आस्था से जुड़ी परंपरा देखने को मिलती है। इस दिन माता की दिव्य पिंडी पर करीब 51किलो मक्खन का लेप किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मक्खन औषधि के रूप में चर्म रोगों में लाभकारी माना जाता है।
कहा जाता है कि यह परंपरा माता के घावों को मक्खन से ठीक करने से जुड़ी प्राचीन कथा से प्रेरित है। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस वर्ष 25जनवरी को हवन उपरांत यह मक्खन प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया जाएगा।मक्खन लेप परंपरा की कहानी माता बाला सुंदरी मंदिर, मुलाना में मनाई जाने वाली एक प्राचीन कथा से जुड़ी है।
कथा के अनुसार, माता रानी ने राक्षसों और असुरों के साथ युद्ध किया था, जिसमें उन्हें कई घाव लगे थे। इन घावों को ठीक करने के लिए माता रानी पर मक्खन का लेप किया गया था।तब से यह परंपरा चली आ रही है, जिसमें मकर संक्रांति पर माता की दिव्य पिंडी पर मक्खन का लेप किया जाता है। इस मक्खन को औषधि के रूप में देखा जाता है, जो चर्म रोगों को ठीक करने में मदद करता है।इस परंपरा का पालन मुलाना में पिछले 17वर्षों से किया जा रहा है, और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। मक्खन के लेप को प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है, जो चर्म रोगों के लिए बहुत ही असरकारक माना जाता है।
उल्लेखनीय है कि कांगड़ा स्थित ब्रजेश्वरी मंदिर के बाद केवल मुलाना में ही यह विशेष परंपरा निभाई जाती है, जो आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। मुलाना में यह परंपरा पिछले 17वर्षों से निरंतर चली आ रही है, जिसमें हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।श्रद्धालुओं का दावा है कि इस मक्खन रूपी औषधि से उन्हें त्वचा संबंधी रोगों में लाभ मिला है, जिससे लोगों की आस्था और अधिक गहरी होती जा रही है।
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