अली खान महमूदाबाद पर शिकंजा कसने को तैयार, SC के आदेश के बाद हरियाणा सरकार का बड़ा कदम

अली खान महमूदाबाद पर शिकंजा कसने को तैयार, SC के आदेश के बाद हरियाणा सरकार का बड़ा कदम

Ali Khan Mehmudabad Controversy: हरियाणा के अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख अली खान महमूदाबाद की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर लिया है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने कोर्ट के आदेश के मुताबिक तीन आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी बना दी है।

हरियाणा सरकार का कदम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने एसआईटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह जांच दल प्रोफेसर के सोशल मीडिया पोस्ट में प्रयुक्त शब्दों और उनके इरादों की गहराई से जांच करेगा। हरियाणा पुलिस ने पहले ही दावा किया है कि वे अधिक आपत्तिजनक सामग्री की तलाश में हैं और कोर्ट ने उन्हें ऐसी सामग्री अगर मिलती है, तो रिकॉर्ड पर पेश करने की अनुमति दी है। यह कदम संकेत देता है कि जांच अभी लंबी चल सकती है, जिससे प्रोफेसर महमूदाबाद के लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को हरियाणा पुलिस ने दिल्ली में उनके आवास से 18मई 2025को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी दो एफआईआर के आधार पर हुई, जो हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया और बीजेपी युवा मोर्चा के महासचिव योगेश जठेड़ी की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों में प्रोफेसर के सोशल मीडिया पोस्ट को ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में आपत्तिजनक बताया गया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर सैन्य कार्रवाई और महिला सैन्य अधिकारियों, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की प्रेस ब्रीफिंग पर टिप्पणी की थी।

बता दें, महमूदाबाद ने अपने पोस्ट में लिखा था कि वह राइट-विंग कमेंटेटर्स द्वारा कर्नल कुरैशी की प्रशंसा से खुश हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों को मॉब लिंचिंग और मनमाने ढंग से घरों को तोड़े जाने के शिकार लोगों के लिए भी उतनी ही जोरदार आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दो महिला सैन्य अधिकारियों द्वारा प्रेस ब्रीफिंग का ऑप्टिक्स महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर यह जमीनी हकीकत में नहीं बदलता, तो यह सिर्फ पाखंड है।'

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए करते हुए प्रोफेसर को 21 मई को अंतरिम जमानत दे दी। लेकिन कोर्ट ने जांच को रोकने से इनकार कर दिया। जस्टिस सूर्य कांत और एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को 24 घंटे के भीतर एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया। इस एसआईटी में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को शामिल करने का निर्देश दिया गया, जिनमें से एक महिला अधिकारी होनी चाहिए और ये अधिकारी हरियाणा या दिल्ली से नहीं होने चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत केवल जांच को सुविधाजनक बनाने के लिए दी गई है, न कि मामले को खारिज करने के लिए।

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