Gulf Nations Tension: युद्ध की आंच क्रिकेट के मैदान तक पहुंची, ड्यूक्स गेंद की सप्लाई घटने से खेल पर छाया संकट!

Gulf Nations Tension: युद्ध की आंच क्रिकेट के मैदान तक पहुंची, ड्यूक्स गेंद की सप्लाई घटने से खेल पर छाया संकट!

Dukes Ball Supply Chain: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर क्रिकेट के मैदान तक पहुंच गया है। दरअसल, इंग्लैंड के आगामी घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत से पहले बड़ा खतरा मंडारने लगा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इंग्लैंड में टेस्ट और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के लिए इस्तेमाल होने वाली ड्यूक्स गेंदों की सप्लाई प्रभावित हुई है।

बता दें कि 1760 से संचालन कर रही ड्यूक्स कंपनी हर साल करीब 4000 से 5000 लाल गेंदें तैयार करती है। जिनका इस्तेमाल इंग्लैंड के समर सीजन में किया जाता है लेकिन, इर बार युद्ध के कारण हालात सामान्य नहीं है।

सप्लाई चेन में रुकावट

ड्यूक्स कंपनी के मालिक दिलीप जाजोदिया लगभग 40 साल से क्रिकेट गेंद के कारोबार से जुड़े हैं, उनका कहना है कि सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के चलते उन्हें काउंट क्लब्स को सीजन शुरू होने के बाद केवल 50फीसदी गेंदे ही देनी पड़ी हैं। दिलीप जाजोदिया का कहना है कि हम इस समय संकट से जूझ रहे हैं। हमें क्लब्स को आधी गेंदें देकर शुरुआत करनी पड़ रही है और हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

ड्यूक गेंद बनाने की प्रक्रिया

दरअसल, ड्यूक्स गेंदों की निर्माणा प्रक्रिया कई स्टेप्स में होती हैं। दरअसल, गेंद के लिए चमड़ा ब्रिटेन की गायों से लिया जाता है और उसे चेस्टरफील्ड में प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद सिलाई के लिए यह मटेरियल दक्षिण एशिया भेजा जाता है और फिर गेंदें तैयार करके वापस ब्रिटने लाई जाती है। हालांकि, इस बार वापसी की प्रक्रिया सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। जजोदिया के अनुसार, साउथ एशिया में तैयार माल फैक्ट्रियों में रखा हुआ है लेकिन एयरलाइन कार्गो नहीं उठा रही है। दरअसल, युद्ध के कारण खाड़ी देशों के रास्ते में उड़ानें प्रभावित हो रही है। 

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड का बयान 

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड फिलहाल स्थिति को लेकर चिंतित नहीं है। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि प्रोफेशनल काउंटी क्लब्स को सीजन की शुरुआत होने से पहले ही ड्यूक्स गेंदें मिल चुकी है। जितनी गेंदें आमतौर पर दी जाती हैं,उतनी सप्लाई कर दी गई है। बता दें कि ड्यूक्स गेंदों का इस्तेमाल सिर्फ इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि आयरलैंड और वेस्टइंडीज में खेले जाने वाले टेस्ट मैच में किया जाता है।   

 

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