
असम: इन दिनों मेंढक-मेंढकी शादी काफी चर्चा में बनी हुई है। सोशल मीडिया पर दोनों की फोटो और वीडियों वायरल हो रही है। हालांकि फोटो-वीडियो देखकर लोगों को विश्वास नहीं हो रहा है कि यह सच भी हो सकता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये बिलकुल सच है। दरअसल यह एक राज्य की एक परम्परा है जो सालों से उस राज्य में निभाई जा रही है।
आपको बता दें कि असम में लोग मेंढक और मेंढकी की शादी करते हैं। मान्यता है इससे प्रकृति प्रसन्न होती है और इसी वजह से बरसात होती है। धीरे-धीरे ये मान्यता देश के दूसरे इलाकों मे भी निभाई जा रही है। हाल ही में यह परंपरा मध्य प्रदेश में भी देखने को मिली। चावल की खेती के लिए मशहूर असम में जब लंबे समय तक बरसात नहीं होती, तो यहां के किसान देवताओं के राजा इंद्र को प्रसन्न करने के लिए ऐसा करते हैं।
कहा जाता है कि जब किसान इंद्र से बरसात के लिए प्रार्थना करते हैं, तो इंद्र किसानों से कहते हैं कि जब तक यहां के मेंढक बरसात के लिए ‘हां’ नहीं बोलेंगे तब तक वे बरसात नहीं करेंगे।इसी मान्यता के अनुसार गांव के लोग मिलकर मेंढक-मेंढकी की शादी करवाते हैं। असम में इसे ‘बेखुली बियाह’ कहते हैं। असमिया भाषा में ‘बेखुली’ मेंढक को कहते हैं, जबकि ‘बियाह’ का मतलब शादी होता है।
बारिश के मौसम में ही मेंढकों का मिलन होता है, जिसके बाद माना जाता है कि मेंढक प्रसन्न होकर बोलते हैं, जिसे सुनकर इंद्र वर्षा करते हैं। इस अद्भुत शादी में सभी परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। मेंढक की शादी के बाद नवविवाहित जोड़े को पानी में छोड़ दिया जाता है। इस मौके पर गांव की औरतें मंगल गीत भी गाती हैं। इस शादी में क्या बच्चे-बूढ़े, सभी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस शादी का खर्च भी सभी गांव वाले मिलकर उठाते हैं।
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