
Ajab-Gajab: दुनियाभर में कई ऐसी तरह की मछलियां मौजूद हैं, जिन्हें उनके अनोखे होने के कारण जाना जाता है। ऐसी ही एक मछली समुन्द्र में पाई जाती है, जिसे फ्लैशलाइट भी कहा जाता है। दरअसल,अन्य मछलियों से अलग इस यूनिक फिश की आंखों के नीचे एक बायोल्यूमिनसेंट ऑर्गन होता है, जिससे लगातार चमकदार नीली-हरी रोशनी निकलती नजर आती है। साथ ही इस मछलियों को लालटेन-आई मछली के नाम से भी जाना जाता है।
बता दें कि इन फ्लैशलाइट मछलियों की लाइट और चमकने के पीछे की वजह लाइट ऑर्गन हैं। जिनमें लाखों बायोल्यूमिनसेंट बैक्टीरिया होते है। ये ही वजह है कि इसमें से नीली-हरी रोशनी आती है। कहा जाता है कि, इंडो-पैसिफिक महासागर और कैरेबियन सागर में पाई जाने वाली ये मछलियां शिकारियों से बचने के लिए अपनी रोशनी कम कर सकती हैं और इसके उलट अपनी प्रजाति के साथ कम्युनिकेट करने के लिए लाइट का इस्तेमाल करती हैं।
रंग बदलने वाली मछली
वहीं अब वैज्ञानिकों ने एक अनोखी मछली को खोजा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मछली मरने बाद भी अपने परिवेश के मुताबिक अपना रंग बदल सकती है। इसका नाम हॉगफिश हैं। यह मछली मरने के बाद भी अपना रंग परिवेश के हिसाब से बदल लेती है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यह मछली समुद्र की चट्टानों में रहती है। उत्तरी कैरोलिना से लेकर ब्राजील तक अटलांटिक महासागर में आमतौर पर यह मछली पाई जाती है। शायद मछली दुश्मनों से अपनी रक्षा के लिए और अपने साथी को संकेत देने के लिए ऐसा करती है।
वहीं वैज्ञानिकों को सबसे अधिक हैरानी यह हुई कि अनोखी मछली मरने के बाद भी अपना रंग बदल लेती है। नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में एक नया शोध प्रकाशित हुआ है। शोध के मुताबिक, विशेषज्ञों ने मछली के अलग-अलग हिस्सों पर प्रकाश के प्रभाव को माइक्रोस्कोपी के इस्तेमाल से निर्धारित किया।
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