J&K Election: इंजीनियर राशिद की जमानत का चुनाव पर क्या होगा प्रभाव, किसे होगा फायदा, किसे नुकसान? जानें

J&K Election: इंजीनियर राशिद की जमानत का चुनाव पर क्या होगा प्रभाव, किसे होगा फायदा, किसे नुकसान? जानें

Engineer Rashid Bail: जम्मू-कश्मीर में लगभग दस साल के बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और इस समय एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना ने सारा ध्यान खींचा है। बारामुल्ला के निर्दलीय सांसद इंजीनियर राशिद जेल से रिहा हो गए हैं, और उनकी जमानत ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। आइए जानते हैं कि उनकी रिहाई का राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर पड़ सकता है और इससे कौन-कौन से दल प्रभावित हो सकते हैं।

राशिद की जमानत से क्षेत्रीय दलों में चिंता

राशिद इंजीनियर की रिहाई से जम्मू-कश्मीर की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियाँ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) चिंतित हो गई हैं। राशिद ने 2024के लोकसभा चुनाव में जेल से रहते हुए भी बारामुल्ला सीट पर जीत दर्ज की थी, जिससे उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को परेशानी हो रही है। उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि राशिद को जमानत चुनाव के लिए मिली है और उनकी पार्टी बीजेपी के इशारे पर काम कर रही है। वहीं, महबूबा मुफ्ती ने राशिद की पार्टी को बीजेपी की नई प्रॉक्सी दल करार दिया है।

चुनाव पर राशिद की जमानत का प्रभाव

राशिद की जमानत का विधानसभा चुनाव पर गहरा असर पड़ सकता है। उनकी रिहाई से सबसे ज्यादा नुकसान नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) को हो सकता है, यही वजह है कि ये दोनों पार्टियाँ राशिद की जमानत का विरोध कर रही हैं। राशिद की पार्टी के चुनाव प्रचार से बीजेपी को भी लाभ हो सकता है, खासकर यदि राशिद की पार्टी NC और PDP के पारंपरिक वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहती है।

बीजेपी को संभावित फायदा

राशिद की पार्टी यदि अपने अभियान को सफल बनाती है, तो इसका फायदा बीजेपी को हो सकता है। घाटी में NC और PDP का एक मजबूत वोट बैंक है, और राशिद की पार्टी इसे अपने पक्ष में लाने का प्रयास कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो चुनाव त्रिकोणीय हो जाएगा, जिससे बीजेपी को एक लाभ मिल सकता है। पीडीपी और राशिद की पार्टी के बीच कोई गठबंधन नहीं होने के कारण, पीडीपी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मिल सकते है सहानुभूति वोट

राशिद की लंबे समय से जेल में रहने की स्थिति से उन्हें जनता की सहानुभूति मिल सकती है, जैसा कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में अनुभव किया था। इस बार विधानसभा चुनाव में भी उनकी पार्टी इस सहानुभूति का फायदा उठाने का प्रयास कर सकती है। राशिद की पार्टी ने विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में कैदियों की रिहाई और PSA/USPA को रद्द करने का वादा किया है, जो चुनावी प्रभाव डाल सकता है।

26सीटों पर चुनाव लड़ रही राशिद की पार्टी

राशिद की पार्टी अब जम्मू-कश्मीर में 26सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी का अनुमान है कि विधानसभा चुनाव में उसे करीब 20सीटें मिल सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर की एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बन सकती है। इसके परिणामस्वरूप, बीजेपी छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ गठबंधन कर सत्ता में आ सकती है। बीजेपी की नजर इस बार निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी है, जिन्हें एक साथ लाकर सत्ता में आने का प्रयास किया जा सकता है।

निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या

इस बार जम्मू-कश्मीर की विधानसभा चुनावों में कुल 485उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, जिनमें से 214निर्दलीय हैं। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। हालांकि, जमात-ए-इस्लामी के समर्थक अपनी क्षेत्रीय पार्टी बनाने में असफल रहे हैं, इसलिए उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में चुनावी मैदान में कदम रखा है। यह एक नया रिकॉर्ड बनाता है।

राशिद का राजनीतिक बैकग्राउंड

इंजीनियर राशिद को 2016 में जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग के आरोप में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी का मामला तब सामने आया जब एनआईए कश्मीरी कारोबारी जहूर वताली की जांच कर रही थी, जिसे आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों के लिए फंडिंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। राशिद को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट से 2 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत मिली है और इससे पहले उन्हें सांसद के रूप में शपथ लेने की अनुमति दी गई थी।

Leave a comment