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Israel Palestine War: क्या है गाजा पट्टी? जहां इजरायल कर रहा है अब लगातार हमले

Israel Palestine War: क्या है गाजा पट्टी? जहां इजरायल कर रहा है अब लगातार हमले

Israel Palestine War: हमास के हमले के बाद इजराइल ने युद्ध की घोषणा कर दी और गाजा पर हमले तेज कर दिए गए है। गाजा पट्टी पर एक बार फिर इजरायली हमले शुरू हो गए हैं। इजराइल के ताबड़तोड़ रॉकेट हमलों से गाजा के कई इलाके तबाह हो रहे हैं।

हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में, जब भी इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष हुआ है, गाजा संघर्ष का केंद्र बन गया है। गाजा पट्टी एक समय इजराइल के नियंत्रण में थी, लेकिन एक दशक से अधिक समय से इस पर फिलिस्तीनी प्राधिकरण का शासन है।

कैसा है गाजा पट्टी का क्षेत्रफल

गाजा पट्टी इजराइल से 6-10 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह क्षेत्र विस्तृत एवं लगभग 45 किमी लम्बा है। इसके तीन तरफ इजराइल का नियंत्रण है। मिस्र दक्षिण में है। पश्चिम में भूमध्य सागर में इसके क्षेत्रीय जल पर इज़राइल का नियंत्रण है। इसका नाम इसके मुख्य शहर गाजा (जिसे गाजा भी कहा जाता है) के नाम पर रखा गया है। इसका दूसरा प्रमुख शहर इसके दक्षिण में स्थित राफ़ा है, जो मिस्र की सीमा से सटा हुआ है। गाजा पट्टी में लगभग 15 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 4 लाख से ज्यादा लोग अकेले गाजा शहर में रहते हैं।

गाजा पट्टी का इतिहास

गाजा पट्टी का इतिहास 1948 में इजराइल के निर्माण से शुरू होता है। 1948 में इजराइल के निर्माण के बाद यहां बसे अरबों के लिए एक युद्धविराम रेखा खींची गई, जिसके तहत यह तय किया गया कि अरब और मुस्लिम गाजा पट्टी में रहेंगे और यह निर्णय लिया गया कि यहूदी इज़राइल में रहेंगे। 1948 से 1967 तक इस पर मिस्र का नियंत्रण था। लेकिन 1967 में 6 दिनों की लड़ाई के बाद इजराइल ने अरब देशों को निर्णायक रूप से हरा दिया। गाजा पट्टी पर इजराइल ने कब्जा कर लिया था। जो 25 साल तक चला।

दिसंबर 1987 में गाजा पट्टी में जबरदस्त विद्रोह हुआ। इसके बाद 1994 में यह निर्णय लिया गया कि इस क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से फिलिस्तीन प्राधिकरण (PA) को हस्तांतरित किया जाएगा। वर्ष 2000 में तत्कालीन इजरायली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन ने एक नई योजना के तहत गाजा क्षेत्र से इजरायली सैनिकों को हटाने और स्थानीय नागरिकों को बसाने की योजना बनाई।

2005 में इसका नियंत्रण PAको सौंप दिया गया लेकिन इजराइल ने गश्त जारी रखी। हालाँकि, 2007 में हमास के नेतृत्व वाली पार्टी ने इस पर कब्ज़ा कर लिया। लेकिन इसके बाद से इजराइल ने न सिर्फ इस इलाके को बंद कर दिया है बल्कि कई तरह के प्रतिबंध भी लगा रहा है।

ग़ाज़ा दुनिया भर में सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र

गाजा दुनिया का सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है। प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 4,505 लोग रहते हैं। अनुमान के मुताबिक, 2020 तक यहां प्रति वर्ग किलोमीटर 5,835 लोग रहने लगेंगे। 2020 तक इसकी आबादी करीब 21 लाख तक पहुंच गई। 53 फीसदी से ज्यादा आबादी युवा है।

गाजा की 21 फीसदी आबादी बेहद गरीब है। ये लोग प्रतिदिन 18 डॉलर से भी कम पर गुजारा करने को मजबूर हैं। यहां बेरोजगारी दर 40.8 फीसदी है। युवाओं में बेरोजगारी दर 50 फीसदी से भी ज्यादा है। यहां की सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपने 50 हजार कर्मचारियों को समय पर वेतन दे सके।

गाजा में 694 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 4।63 लाख बच्चे पढ़ते हैं। अधिकांश स्कूल संयुक्त राष्ट्र द्वारा चलाए जाते हैं। इनमें से अधिकतर स्कूल डबल शिफ्ट में चलते हैं। हालाँकि, यहाँ शिक्षा की दर काफी ऊँची है। 93 प्रतिशत महिलाएं और 98 प्रतिशत पुरुष साक्षर हैं।

ग़ाज़ा में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी

ग़ाज़ा में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। बिजली के अभाव में अस्पताल में समय से लोगों को उपचार नहीं मिल पाता। इसके लिए ग़ज़ा मिस्र और इजराइल पर निर्भर रहा है। क़रीब 20 फ़ीसदी लोग इलाज के लिए और 25 फ़ीसदी लोग दवाओं के लिए मिस्र जाते रहे थे, लेकिन मिस्र ने भी अपनी सीमा बंद कर दी। हालांकि इलाज के लिए ग़ाज़ा के लोगों को इजराइल में प्रवेश की सुविधा मिली हुई है।

80 फ़ीसदी आबादी भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर

ग़ाज़ा की 80 फ़ीसदी आबादी भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर है। लोगों के पास अनाज ख़रीदने के लिए पैसे नहीं हैं। 2012 से 2013 के बीच ग़ाज़ा में ख़ाद्य असुरक्षा 44 फ़ीसदी से बढ़कर 57 फ़ीसदी पर पहुंच गई है। इजराइल की ओर से घोषित संघर्ष क्षेत्र में खेती पर रोक से ग़ाज़ा का अनाज उत्पादन 75 हज़ार टन कम हो गया है। समुद्री क्षेत्र में मछली मारने के लिए लगाए प्रतिबंध से भी ग़ाज़ा के लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं।

ग़ाज़ा के लोग हर दिन बिजली संकट का सामना करते हैं। ग़ाज़ा को बिजली इजराइल और मिस्र से मिलती है। देश में एक ही बिजली प्लांट है। कई घरों में जेनरेटर की सुविधा है, लेकिन इसके लिए काफ़ी महंगा ईंधन ख़रीदना पड़ता है। बिजली की कमी का असर दूसरी सुविधाओं पर भी होता है।

3.5 लाख लोग दूषित पानी पीने को मजबूर

ग़ाज़ा में नाममात्र की बारिश होती है। जल की खपत बढ़ रही है, ऐसे में संकट भी बढ़ रहा है। देश में 5।5 फ़ीसदी लोगों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदंडों के मुताबिक़ पीने का पानी मिलता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ करीब 3।5 लाख लोग दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं। यहां गंदे पानी के निकास का समुचित प्रबंध नहीं है। क़रीब नौ करोड़ लीटर गंदा पानी हर रोज़ भूमध्य सागर में गिरता है, जिसका असर आम लोगों की सेहत और जलीय जीव जंतुओं पर पड़ रहा है।

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