EX Officer Write Open Letter: ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच 124 पूर्व IAS और IFS अधिकारियों ने आयोग के समर्थन में आवाज उठाई है। 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बीच इन पूर्व अधिकारियों ने आम नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी कर चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव किया। उन्होंने चुनाव में वोटों की हेराफेरी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।
पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में कहा कि भारत की चुनावी व्यवस्था समय के साथ मजबूत हुई है। पहले बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स में फर्जी वोट डालने और चुनावी हिंसा जैसी समस्याएं सामने आती थीं, लेकिन अब चुनाव प्रक्रिया में कई तरह की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने पोलिंग एजेंटों की भूमिका, EVM की सीलिंग, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और VVPAT सत्यापन जैसे उपायों का उल्लेख किया।
पत्र में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का भी उदाहरण दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस चुनाव में दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और 1951 के बाद सबसे ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए ठोस प्रमाण होना जरूरी है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर क्या बोले पूर्व अधिकारी?
124 पूर्व IAS और IFS अधिकारियों ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और उसके संस्थागत ढांचे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के तहत सत्तारूढ़ पार्टी कई राज्यों में चुनाव हार चुकी है और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपना संसदीय बहुमत भी खो चुकी है।
पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में कहा कि कोई भी चुनावी व्यवस्था ऐसी नहीं हो सकती, जिसे जीत मिलने पर निष्पक्ष और हारने पर धांधली वाली बता दिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सवाल पूछना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन आरोप लगाने वालों की जिम्मेदारी है कि वे अपने दावों को सबूतों के साथ साबित करें।
SIR को लेकर अधिकारियों ने क्या तर्क दिए?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करते हुए पूर्व अधिकारियों ने कहा कि वोटर लिस्ट को सही और अद्यतन बनाए रखने के लिए ऐसी प्रक्रिया जरूरी है। पत्र में बिहार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि पुनरीक्षण के दौरान लगभग 22 लाख मृत मतदाताओं और 7 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान हुई, जबकि करीब 21.5 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया।
अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों को हटाना और पात्र मतदाताओं को शामिल करना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि गलतियों से भरी मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव के उद्देश्य को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, इन आंकड़ों और दावों को समझने के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हैं।
SIR में नोटिस, सुनवाई और अपील जैसे सुरक्षा उपाय
पूर्व अधिकारियों ने कहा कि SIR की प्रक्रिया में नोटिस जारी करने, सुनवाई और अपील जैसे प्रावधान मौजूद हैं। इसके अलावा राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। पत्र में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रक्रिया की न्यायिक जांच हुई और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर भी विचार किया गया।
वोट चोरी के आरोपों पर दिया कड़ा संदेश
चुनावी नतीजों में हेराफेरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व अधिकारियों ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई राजनीतिक दल उसी चुनावी व्यवस्था के तहत जीतता है, तो हार के बाद उसी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का आधार क्या है।
इस खुले पत्र के सामने आने से चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जहां पूर्व अधिकारियों ने चुनावी व्यवस्था की मजबूती और आयोग की स्वतंत्रता का समर्थन किया है, वहीं इस मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित तथ्यों, आधिकारिक दस्तावेजों और सभी पक्षों के तर्कों को देखना जरूरी है।
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