केदारनाथ धाम की उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर की सड़क पर हुई इमरजेंसी लैंडिंग

केदारनाथ धाम की उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर की सड़क पर  हुई इमरजेंसी लैंडिंग

Kedarnath Emergency Landing: उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ स्थल केदारनाथ धाम में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यह घटना तब हुई जब फाटा के पास एक हेलिकॉप्टर को तकनीकी खराबी के कारण सड़क पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। हेलिकॉप्टर केदारनाथ धाम की ओर उड़ान भर रहा था। जिसमें तीर्थयात्री सवार थे। पायलट की सूझबूझ और तुरंत निर्णय के कारण सभी यात्री सुरक्षित रहे और किसी प्रकार के जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ।
 
हादसा में हुआ नुकसान
जानकारी के अनुसार यह हादसा फाटा के पास उस समय हुआ। जब हेलिकॉप्टर में अचानक तकनीकी खराबी का संकेत मिला। पायलट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हेलीपैड से कुछ दूरी पहले सड़क पर हेलिकॉप्टर को सुरक्षित उतार लिया। हादसे के दौरान हेलिकॉप्टर का पिछला हिस्सा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ। लेकिन सभी यात्री और चालक सुरक्षित रहे। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया और यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
 
यह घटना इस वर्ष केदारनाथ धाम में हेलिकॉप्टर से जुड़ी तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले मई 2025 में एम्स ऋषिकेश की एक हेली-एंबुलेंस को तकनीकी खराबी के कारण केदारनाथ हेलीपैड से 20 मीटर पहले क्रैश लैंडिंग करानी पड़ी थी। उस घटना में भी पायलट की सूझबूझ से कोई हताहत नहीं हुआ था। हाल ही में उत्तरकाशी के गंगनानी क्षेत्र में हुए एक अन्य हेलिकॉप्टर हादसे में छह लोगों की मौत ने हेली-सेवाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे।
 
केदारनाथ धाम में हेलिकॉप्टर सेवाएं 
केदारनाथ धाम में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। और हेलिकॉप्टर सेवाएं यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण और सुविधाजनक साधन हैं। गुप्तकाशी, सिरसी, और फाटा से संचालित होने वाली ये सेवाएं यात्रियों को कठिन पैदल मार्ग से बचाती हैं। लेकिन बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं ने हेलिकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और रखरखाव पर सवाल उठा रहें हैं।
 
जानकारों का कहना है कि केदारघाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सिंगल-इंजन हेलिकॉप्टरों का उपयोग जोखिम भरा हो सकता है।
वहीं रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि हेलिकॉप्टर की तकनीकी खराबी की जांच के लिए एक विशेषज्ञ टीम गठित की गई है। डीजीसीए (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और हेली-सेवा देने वालों को और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

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