CJP Protest: दिल्ली पुलिस ने शनिवार, 3 अक्टूबर, 2026 को छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं द्वारा शुक्रवार (2 अक्टूबर) को जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने के प्रयास के संबंध में कम से कम तीन एफआईआर दर्ज कीं, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दो एफआईआर और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेश की कथित अवज्ञा के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 लगाई गई है। वहीं मुंबई पुलिस ने भी सीजेपी नेताओं समेत 500 प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर हुई है। दोनों जगहों पर पुलिस ने सुबह से ही व्यवस्थाएं सख्त कर दी थी।
एफआईआर में किसी का नाम नहीं
एफआईआर में किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी नहीं बनाया गया है। हालांकि, एफआईआर में प्रदर्शनों का प्रस्ताव रखने वाले या उनमें भाग लेने वाले आयोजकों और संगठनों का विवरण दिया गया है, एक अधिकारी ने बताया। शुक्रवार (2 अक्टूबर) को छात्रों, राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) से संबंधित आरोपों को लेकर कुमार के इस्तीफे की मांग करने के लिए जंतर-मंतर पहुंचने का प्रयास किया। चुनाव आयोग का रुख और इन आरोपों पर उसकी प्रतिक्रियाएं एफआईआर में विस्तार से नहीं बताई गई हैं।
प्रदर्शनकारियों ने किया निषेधाज्ञा का उल्लंघन
पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत नई दिल्ली जिले में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। जन सुरक्षा सुनिश्चित करने, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और यातायात की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विरोध प्रदर्शन से पहले ये आदेश जारी किए गए थे। धारा 163 के तहत, पूर्व लिखित अनुमति के बिना पांच या दो से अधिक लोगों के जमावड़े, जुलूस, प्रदर्शन, धरना, नारे लगाना और भाषण देना प्रतिबंधित था।
कई तरह के वस्तुएं ले जाना भी था प्रतिबंधित
आग्नेयास्त्र, बैनर, पोस्टर, लाठी, तलवार, डंडे, ईंट-पत्थर और इसी तरह की वस्तुएं ले जाना भी प्रतिबंधित था। पुलिस ने शुक्रवार (2 अक्टूबर) की सुबह प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से लगभग तीन घंटे पहले सार्वजनिक रूप से प्रतिबंधों की सूचना दी थी और चेतावनी दी थी कि उल्लंघन करने पर बीएनएस की धारा 223 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। धारा 223 के तहत ऐसे आदेश की अवज्ञा करने पर छह महीने तक की कैद या 2,500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि अवज्ञा से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है या होने की संभावना होती है, या दंगा या मारपीट होती है या होने की संभावना होती है, तो पुलिस के अनुसार सजा एक वर्ष तक या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकती है।
लगभग 1,000 लोगों को हिरासत में लिया
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने बड़े समूहों को विरोध स्थल तक पहुंचने से रोककर लगभग 1,000 लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए कई लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में आप नेता सौरभ भारद्वाज, आतिशी, संजय सिंह, कुलदीप कुमार, जरनैल सिंह और संजीव झा, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, नागरिक समाज कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, राजद सांसद मनोज झा, सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी संदेश, भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और डीवाईएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एए रहीम शामिल हैं। कई गिरफ्तार लोगों को फतेहपुर बेरी, द्वारका सेक्टर 23, करावल नगर और बदरपुर सहित विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया। पुलिस कार्रवाई से मिली जानकारी के अनुसार, आतिशी, अनुराग ढांडा और कुलदीप कुमार को फतेहपुर बेरी ले जाया गया, जबकि संजय सिंह, भारद्वाज और संजीव झा को द्वारका सेक्टर 23 ले जाया गया।
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