दिल्ली में झुग्गी तोड़फोड़ पर सियासी बवाल, बाढ़ नियंत्रण या गरीबों की बेदखली?

दिल्ली में झुग्गी तोड़फोड़ पर सियासी बवाल, बाढ़ नियंत्रण या गरीबों की बेदखली?

CM Rekha Gupta Bulldozer: दिल्ली में हाल ही में हुई झुग्गी तोड़फोड़ ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मद्रासी कैंप समेत कई इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई को कोर्ट के आदेशों के तहत जरूरी बताया, जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इसे गरीबों के खिलाफ साजिश का नाम दिया। यह विवाद तब और गहरा हो गया, जब रविवार को नेहरू कैंप में CM ने इस कार्रवाई का बचाव किया।

कोर्ट के आदेश और बाढ़ नियंत्रण का दावा

रेखा गुप्ता ने कहा कि बारापुला नाले के किनारे बनी मद्रासी कैंप झुग्गी को हटाने का आदेश दिल्ली हाई कोर्ट ने चार बार दिया था। इसका मकसद नाले की सफाई कर 2023 जैसी बाढ़ से बचाव करना था।CM ने जोर देकर कहा कि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कोई नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि मद्रासी कैंप के 370 परिवारों में से 189 को नरेला में वैकल्पिक घर दिए गए, जबकि 181 परिवार पुनर्वास के लिए अयोग्य थे। गुप्ता ने यह भी कहा कि रेलवे कॉलोनी जैसे अन्य इलाकों में भी ऐसी कार्रवाई हुई, ताकि जान-माल का नुकसान रोका जा सके।

विपक्ष का हमला

आप और कांग्रेस ने बीजेपी पर गरीबों को धोखा देने का आरोप लगाया। आप नेता आतिशी ने कहा कि बीजेपी ने चुनाव में ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही मद्रासी कैंप को ध्वस्त कर दिया। आतिशी ने दावा किया कि नरेला के नए घरों में बिजली, पानी और परिवहन जैसी मूल सुविधाएं नहीं हैं, जिससे बेघर परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कांग्रेस ने भी इसे गरीबों के प्रति असंवेदनशील कदम बताया।

विकास का दावा लेकिन फिर भी  सवाल बरकरार

सीएम गुप्ता ने कहा कि बीजेपी सरकार दिल्ली में 700 करोड़ रुपये के विकास कार्य कर रही है, जो पहले की सरकारों ने नहीं किए। लेकिन विपक्ष का सवाल है कि अगर बाढ़ नियंत्रण जरूरी था, तो क्या गरीबों को पहले बेहतर पुनर्वास नहीं दिया जाना चाहिए था? यह विवाद दिल्ली की सियासत को और गर्माने वाला है।

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