
Rekha Gupta Oath Ceremony: दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। भाजपा विधायक रेखा गुप्ता को दिल्ली की नई मुख्यमंत्री चुना गया है। भाजपा के दिल्ली प्रदेश कार्यालय में आयोजित विधायक दल की बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रवेश वर्मा, विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर परिवारवाद के आरोपों से बचने का प्रयास किया है। प्रवेश वर्मा, जो पूर्व मुख्यमंत्री साहेब सिंह वर्मा के बेटे हैं, इस पद की दौड़ में थे। यदि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता, तो भाजपा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लग सकता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी परिवारवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं, इसलिए भाजपा ने एक नई छवि प्रस्तुत करने का निर्णय लिया।
साफ-सुथरी छवि वाली नेता
रेखा गुप्ता लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रही हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की अध्यक्ष के रूप में राजनीति में कदम रखा था और नगर निगम पार्षद के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। 1992 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ने के बाद से उनकी छवि बेदाग रही है। उनकी तुलना में, प्रवेश वर्मा को हिंदू नेता के रूप में देखा जाता था, जबकि रेखा गुप्ता शांत और सौम्य छवि वाली नेता मानी जाती हैं।
महिला नेतृत्व को प्राथमिकता
भाजपा ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया है। हालिया चुनावों में महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में अधिक रही थी, जिसे भाजपा ने भुनाने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री मोदी हमेशा महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर देते रहे हैं। वर्तमान में भाजपा शासित किसी भी राज्य में महिला मुख्यमंत्री नहीं थी, ऐसे में रेखा गुप्ता की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हरियाणा मूल के मतदाताओं को साधने की कोशिश
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं, वहीं रेखा गुप्ता का जन्म भी हरियाणा में हुआ है। भाजपा ने उनकी नियुक्ति से हरियाणा मूल के मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। दिल्ली में हरियाणा मूल के लोगों की संख्या काफी अधिक है, जिससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है।
वैश्य समाज को जोड़ने की रणनीति
आम आदमी पार्टी (AAP) को वैश्य समुदाय का व्यापक समर्थन प्राप्त था, जो न केवल वोट बैंक के रूप में बल्कि चंदा देने के मामले में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। अरविंद केजरीवाल खुद को महाजन समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। भाजपा ने वैश्य समाज से आने वाली रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर इस समुदाय को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया है।
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