नक्सलियों की गोलियां सहकर भी लड़े जवान, शौर्य चक्र से सम्मानित हुए CRPF के वीर

Shaurya Vir chakra: वो किसी घर का चिराग थे, या परिवार का सहारा, एक लड़की की मांग का सिंदूर थे , तो घरवालों की आंख का तारा,लेकिन जवान ने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया,भारत मां की रक्षा में अपना जीवन लगा दिया। सीआरपीएफ के सात कोबरा कमांडोज को नक्सलियों के खिलाफ अदम्य साहस दिखाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। यह देश का तीसरा सबसे बड़ा शांतिकाल वीरता पुरस्कार है। गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में इन जवानों को सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों में इन जवानों ने बहादुरी की मिसाल कायम की, जिससे नक्सलवाद को जल्द खत्म करने की उम्मीद बढ़ गई है।
गोलियां सहकर भी डटे रहे जवान
कॉन्स्टेबल लखवीर सिंह बम धमाके में घायल हो गए, जबकि कॉन्स्टेबल पांचाल को गोली लगी। फिर भी, दोनों ने नक्सलियों से डटकर मुकाबला किया। कॉन्स्टेबल मलकीत सिंह ने अपने साथी पवन कुमार के शव को वापस लाने के लिए भारी गोलीबारी का सामना किया। इस साहस के लिए इन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन 201 के कॉन्स्टेबल पवन कुमार और देवन सी को मरणोपरांत शौर्य चक्र दिया गया। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में टेकलगुडियम में नया बेस बनाने के दौरान ये जवान वीरगति को प्राप्त हुए। 30 जनवरी 2024 को ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने ग्रेनेड लॉन्चर और मिसाइलों से हमला किया, लेकिन इन जवानों ने हार नहीं मानी। उनकी कोशिशों से नक्सलियों की कमर टूट गई।
पांच माओवादियों को ढेर करने वाले जवानों को सम्मान
झारखंड के चतरा जिले में 3 अप्रैल 2023 को सीआरपीएफ की 203 कोबरा बटालियन ने 50 मिनट की मुठभेड़ में पांच शीर्ष माओवादियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन में डिप्टी कमांडेंट विक्रांत कुमार और इंस्पेक्टर जेफ्री हिंगचुलो ने अहम भूमिका निभाई। उन्हें भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इस ऑपरेशन में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुए।
कोबरा बटालियन की खासियत
बता दें 2008 में गठित कोबरा बटालियन जंगल युद्ध में माहिर है। नक्सलियों के खिलाफ अभियानों में इसकी भूमिका अहम रही है। इन जवानों की बहादुरी ने नक्सलियों को उनके गढ़ में घेर लिया है, जिससे नक्सलवाद के खात्मे की उम्मीद बढ़ी है।
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