
CBI On Kolkata Rape Murder Case: कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या मामले में पूरे देश के लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। CBI लगातार इस मामले की जांच कर रही है। इस बीच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में CBI ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक की गई जांच में मृतका के साथ गैंगरेप की पुष्टि नहीं हुई है। यानी सिर्फ एक व्यक्ति ने ही मृतक लड़की के साथ हैवानियत की है। हालांकि, जांच अभी भी जारी है। इस मामले CBI ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिसिंपल संदीप घोष से भी पूछताछ की है। CBI ने अबतक डॉ. संदीप घोष से करीब 60 घंटों से अधिक की पूछताछ की है। हालांकि, पेश किए गए रिपोर्ट में मुख्य आरोपी संजय रॉय की इस घटना में संलिप्तता होने की बात की CBI ने पुष्टि की है। इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए CBI ने CCTV फुटेज के अलावा भी कई चीजों को आधार बनाया है। हालांकि, अभी तक इस मामले में CBI ने गैंगरेप की आशंका को नकारा भी नहीं है। बता दें, इस मामले की सुनवाई SC में हो रही है।
“30 सालों में ऐसी लापरवाही नहीं देखी”
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए गंभीर टिप्पणी की है। कोलकाता मामले पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि ये केस चौंकाने वाला है। हमने बीते 30 साल में ऐसा केस नहीं देखा। यह पूरा मामला सदमा देने वाला है। बंगाल पुलिस का व्यवहार शर्मनाक है। अपने स्टेटस रिपोर्ट में CBIने दावा किया है कि जहां ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप हुआ, वहां छेड़छाड़ की गई। यानी क्राइम सीन से CBIने छेड़छाड़ होने की बात की है। इसके अलावा CBIने कहा कि केस की लीपापोती की कोशिश की गई और अंतिम संस्कार के बाद एफआईआर दर्ज हुई। इसके साथ ही कोर्ट ने भी बंगाल पुलिस पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर स्वाभाविक मौत थी तो पोस्टमार्टम क्यों किया गया? पोस्टमार्टम के बाद एफआईआर से हैरानी होती है।
कोर्ट ने बंगाल पुलिस पर उठाए सवाल
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन का रवैया उदासीन रहा है। घटना की सूचना पीड़िता के परिजनों को देरी से दी गई। परिवार को पहले सुसाइड की खबर दी गई। मर्डर को सुसाइड बताने की कोशिश करना संदेह पैदा करता है। वारदात पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। कोर्ट ने भी कहा कि पुलिस डायरी और पोस्टमार्टम के वक्त में अतंर है। आरोपी की मेडिकल जांच पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। केस की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस का ये आरोप सरासर गलत है कि डॉक्टर की मौत से सदमे में आए उसके पिता ने शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं करने को कहा था। लेकिन बाद में पिता के कहने पर एफआईआर दर्ज हुई। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एफआईआर हॉस्पिटल ने नहीं बल्कि पीड़िता के पिता ने दर्ज कराई। कोलकाता पुलिस का यह आरोप गलत है कि पीड़िता के पिता ने ही एफआईआर दर्ज नहीं करने को कहा था।
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