
नई दिल्ली: भारत के कई राज्य इस वक्त बिजली की समस्या से परेशान हो रहे है। जिसका सीधा कारण कोयले की कमी को कहा जा रहा है। देश में कोयल की किल्लत की खबरें सुन-सुन के आप बोर हो गए होगें और हर कोई यह सोचने पर मजबूर हो गया होगा कि आखिरकार ये कोयला बनता कैसे है। अब आप कहेंगे कि कोयला की खानें है जिससे कोयला आता है, लेकिन इस खानों में कोयला कहां से आता है। या फिर कैसे बनता है। ये किसी को नहीं पता है।
चलिए हम आपको बताते है कि कोयला कैसे बनता है
करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर होने वाली प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी का निकलना, आकाश में बिजली का गिरना आदि घटनाओं के कारण पृथ्वी पर उपस्थित पेड़ पौधों जमीन के अंदर दब गए जिस कारण कोयले का निर्माण होता है। जहां से कोयला निकलता है वहीं पर कोयले की खानें बना दी जाती है। जिसके इस्तेमाल कर हम बिजली बनाते है।
अब बात करते है कि असल में कोयला कैसे बनता है
कोयला बनाने के लिए सबसे पहले भारी मात्रा में लकड़ियों की जरूरत होती है। उनको इकट्ठा करके छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दिया जाता है। इसके बाद लकड़ियों के टुकड़ों को भट्टी में डाल दिया जाता है। जिसमें एक छोटा-सा हॉल बनाया जाता है उसके बाद उन लकड़ियों में आग लगा दी जाती है। लगभग एक सप्ताह के दौरान कोयला तैयार हो जाता है। अगर भट्ठी में 30 क्विंटल डालते है तो इसमें से 8 क्विंटल ही कोयला बन पाता है।
देश में कोयला संकट गहराता जा रहा है। देश के कई पावर प्लांट्स में कुछ ही दिनों के कोयल का स्टॉक बचा है। देश के लगभग सभी राज्यों ने केंद्र सरकार से कोयला संकट की वजह से बिजली उत्पादन में कमी की बात कहीं है। जो अब चिंता का विषय बन गया है। हालांकि केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहा कि केंद्र सरकार दिन-प्रतिदिन, घंटे के आधार पर स्थिति की निगरानी कर रही है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में और हम देश को आवश्यक कोयले की आपूर्ति करेंगे।
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