देश में बाल विवाह एक बीमारी, हर साल आ रहे 22 करोड़ से ज्यादा मामले

देश में बाल विवाह एक बीमारी,  हर साल आ रहे 22 करोड़ से ज्यादा मामले

नई दिल्ली: भारत लगातार तरक्की की ओर बढ़ रहा है। भारत के पीछे दुनिया के तमाम देश आ रहे हैं। भारत का अब अपना स्टैंड है और अब भारत के स्टैंड से दुनिया के तमाम देशों का स्टैंड तय होता है। अब भारत लगातार अपनी पकड़ को मजबूत कर रहा है। चाहे, सैन्य सुरक्षा हो, अंतरिक्ष का क्षेत्र हो, या अर्थव्यवस्था की बात हो हम लगातार आगे बढ़ते जा रहे है। लेकिन कुछ चीजें आज भी हमारे देश को सबसे पीछे किए हुए है वो है, देश में बाल विवाह के बढ़ते केस।

बता दें, भारत में 5 साल में बाल विवाह के दर्ज मामलों की संख्या करीब 3 गुना बढ़ गई है। जिसमें 22 करोड़ से ज्यादा दुल्हनें ऐसी हैं, जिनकी उम्र 18 साल से भी कम है। साथ ही रोज 35 लड़कियां की जान बचाई जाती हैं, जिनका शादी के लिए अपहरण हुआ हैं। वहीं ये तीन आंकड़े बताते हैं कि भारत में बाल विवाह आज भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। भारत में शादी करने की कानूनी उम्र लड़कियों के लिए 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल है। हालांकि, अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ में ये कानूनी उम्र अलग-अलग है। मसलन, मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक अगर लड़की की उम्र 15 साल या उससे से ज्यादा है, तो वो अपनी मर्जी से शादी कर सकती है।

दरअसल मुस्लिम लड़के और लड़की की शादी का एक मामला सुप्रीम कोर्ट में सामने आया है जिसमें लड़के और लड़की दोनों ने अपनी मर्जी से शादी कर ली। लेकिन लड़की के परिवार वालों ने इस शादी पर आपत्ति जताई। जिस कारण मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया। ये पूरा मामला 16 साल की लड़की और 21 साल के लड़के की शादी से जुड़ा है। इसी साल13 जून पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने इस शादी को मान्यता दे दी। हाई कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत लड़की शारीरिक रूप से उस स्थिति में पहुंच चुकी है कि उसे शादी करने का अधिकार है।

वहीं इस फैसले को नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने सुप्रीम कोर्ट में चेलेंज किया है। NCPCR ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि हाई कोर्ट का फैसला बाल विवाह की अनुमति दे रहा है और 2006 के बाल विवाह निषेध कानून का उल्लंघन करता है। याचिका में कहा गया है कि ये कानून धर्मनिरपेक्ष है और सभी धर्मों पर लागू होता है।

क्या है बाल विवाह पर आंकड़े?

आजादी के 75 साल बाद भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। देश की 70 फीसदी से ज्यादा आबादी गांवों में रहती है और गांवों में बाल विवाह अभी भी प्रचलित है। बात करें, साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, देश में उस समय 69.5 लाख लड़के और 51.6 लाख लड़कियां ऐसी थीं, जिनकी शादी तय उम्र से पहले ही हो चुकी थी। वहीं सैम्पल रजिस्ट्रार सर्वे की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में देश भर में 1.9% लड़कियां ऐसी थीं, जिनकी शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो गई थी। जिसमें लगभग 28 फीसदी लड़कियां ऐसी थीं, जिनकी शादी तब हुई जब उनकी उम्र 18 से 20 साल के बीच थी।

दरअसल, तीन साल पहले यूनिसेफ की एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में बाल विवाह से जुड़े आंकड़े दिए गए थे। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दुनियाभर में 65 करोड़ से ज्यादा महिलाएं ऐसी हैं जिनकी शादी तय उम्र से पहले ही हो गई थी। इनमें से 28.5 करोड़ महिलाएं साउथ एशिया में हैं। इसमें भी 22.3 करोड़ से ज्यादा अकेले सिर्फ भारत में ही हैं। यानी, भारत 'बालिका वधुओं' का बड़ा घर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आधी से ज्यादा बालिका वधुएं उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हैं। उत्तर प्रदेश में 3.6 करोड़ बालिका वधुएं हैं। जबकि, बिहार में 2.2 करोड़, पश्चिम बंगाल में भी 2.2 करोड़, महाराष्ट्र में 2 करोड़ और मध्य प्रदेश में 1.6 करोड़ बालिका वधुएं हैं।

बाल विवाह होते ही क्यों हैं?

 बाल विवाह के कई सारे कारण होते हैं। लड़कों की तुलना में लड़कियों की शादी जल्दी करवा दी जाती है। भारत में बाल विवाह को लेकर एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें लड़कियों की शादी जल्दी कराने की कई वजहें बताई गई थीं।

• रिपोर्ट में बताया गया कि ज्यादातर पिता अपनी बेटियों की शादी 'डर' के कारण जल्दी करवा देते हैं। पिता को डर बना रहता है कि उनकी बेटी बड़ी होकर उनकी मर्जी के खिलाफ शादी न कर ले या फिर शादी से पहले ही किसी के साथ संबंध न बना ले।

• रिपोर्ट में बताया गया था कि जैसे-जैसे लड़की की उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे उसके बर्ताव पर परिवार से लेकर समाज तक नजर रखने लगता है। लड़की किससे बात कर रही है? कैसे चल रही है? क्या कर रही है? इन सारी बातों पर नजर रहती है। इन्हीं सब डर से भी परिवार लड़कियों की शादी समय से पहले ही करवा देते हैं।

• इसके अलावा भारत में 'आटा-साटा' जैसी कुप्रथा भी चलन में है। ऐसे में अगर घर की एक बेटी की शादी दूसरे घर में करवा रहे हैं, तो उस घर की बेटी की शादी अपने घर में लोग करवा लेते हैं। इससे होता ये है कि बहुत सी लड़कियों की शादी 18 साल से पहले ही हो जाती है।

Leave a comment