
Modi Government On Lateral Entry: केंद्र सरकार ने तमाम विरोध के बीच लेटरल एंट्री पर रोक लगा दी है। इस संबंध में मंगलवार को कार्मिक मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह के द्वारा UPSCके चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा गया है कि तत्काल लेटरल एंट्री को लेकर निकले तमाम विज्ञापनों को वापस ले लिया जाए। इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति के बाद लिया गया है। बता दें, इससे पहले UPSC ने 17 अगस्त को एक विज्ञापन जारी किया था, जिसमें लेटरल एंट्री के जरिए 45 जॉइंट सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर लेवल की भर्तियां निकाली गई थी। जिसको लेकर कई राजनीतिक दलों ने विरोध करने का निर्णय लिया था। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लेटरल एंट्री को दलितों पर प्रहार बताया था। हालांकि, इस सब के बीच सरकार ने विरोध को देखते इसका बचाव भी किया था।
सरकार को क्यों लेना पड़ा फैसला?
कार्मिक मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंहने पत्र में लिखा कि सरकार ने यह फैसला लेटरल एंट्री के व्यापक पुनर्मूल्यांकन के तहत लिया है। इस पत्र में कहा गया है कि अधिकतर लेटर एंट्रीज 2014 से पहले की थी और इन्हें एडहॉक स्तर पर किया गया था। प्रधानमंत्री का विश्वास है कि लेटरल एंट्री हमारे संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के समान होनी चाहिए, विशेष रूप से आरक्षण के प्रावधानों के संबंध में।
हालांकि, इससे पहले जब इस योजना का चौतरफा विरोध हो रहा था तो लेटरल एंट्री के बचाव में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव सामने आए थे। उन्होंने लेटरल एंट्री को कांग्रेस द्वारा लाया गया प्रावधान बताया था।
कांग्रेस का बयान आया सामने
मोदी सरकार के द्वारा लेटरल एंट्री के तहत भर्ती विज्ञापनों को वापस ले लेने के आदेश के बाद कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने इसे संविधान की जीत बताई है। साथ ही कांग्रेस के द्वारा एक्स पर लिखा गया कि मोदी सरकार लेटरल एंट्री में बिना आरक्षण के भर्ती की साजिश कर रही थी, लेकिन अब इस फैसले को वापस लेना पड़ा है। एक बार फिर मोदी सरकार को संविधान के आगे झुकना पड़ा है। आरक्षण विरोधी इस फैसले का कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, नेता विपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन ने खुलकर विरोध किया था। इसकी वजह से ही मोदी सरकार को ये फैसला वापस लेना पड़ा है। साथ ही कांग्रेस ने कहा कि ये बाबा साहेब के संविधान की जीत है। ये हर दलित, शोषित, पिछड़ों की जीत है।
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