
Buddha Purnima 2025:आज पूरे देश में बुद्ध पूर्णिमा मनाया जा रहा है। इसे वैशाखपूर्णिमा भी कहा जाता है, भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) और महापरिनिर्वाण (मृत्यु) का स्मरण कराने वाला पवित्र पर्व है। यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जो वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में भी इसे भगवान विष्णु के नौवें अवतार के रूप में सम्मान दिया जाता है। यह पर्व करुणा, अहिंसा, और आत्मज्ञान का प्रतीक है।
पूजा मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 11मई 2025, रात 10:36बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12मई 2025, रात 11:25बजे
शुभ पूजा समय: प्रातः 05:30से 07:30बजे (सूर्योदय के बाद)
(मुहूर्त स्थानीय समय के अनुसार भिन्न हो सकता है, पंचांग से पुष्टि करें।)
बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?
यह पर्व तीन प्रमुख घटनाओं को समर्पित है:
जन्म:563ईसा पूर्व में लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में सिद्धार्थ गौतम का जन्म हुआ।
ज्ञान प्राप्ति:35वर्ष की आयु में बोधगया (बिहार) में पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को निर्वाण प्राप्त हुआ, और वे गौतम बुद्ध बने।
महापरिनिर्वाण:80वर्ष की आयु में कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में बुद्ध का देहावसान हुआ।
इन घटनाओं के कारण यह दिन बौद्ध धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
उत्सव और पूजा विधि
ध्यान और प्रार्थना:भक्त बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करते हुए ध्यान और प्रार्थना करते हैं।
दान-पुण्य:गरीबों को भोजन, वस्त्र, और अन्य वस्तुएं दान की जाती हैं।
बोधि वृक्ष पूजा:बोधि वृक्ष की पूजा और दीप प्रज्वलन किया जाता है।
शाकाहारी भोजन:अहिंसा के सिद्धांत के तहत शाकाहारी भोजन ग्रहण किया जाता है।
संगति:बौद्ध विहारों में भिक्षुओं के साथ धार्मिक सभाएं आयोजित की जाती हैं।
संदेश
बुद्ध पूर्णिमा हमें बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग (सही दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति, और समाधि) का पालन करने और जीवन में शांति, करुणा, और प्रज्ञा अपनाने की प्रेरणा देता है।
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