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BRICS Summit 2026: 3 दिन, 15 द्विपक्षीय बैठकें और 20 बड़े मुद्दे, जानिए भारत की कूटनीतिक ताकत

BRICS Summit 2026: 3 दिन, 15 द्विपक्षीय बैठकें और 20 बड़े मुद्दे, जानिए भारत की कूटनीतिक ताकत

BRICS Summit 2026: दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित 18वें ब्रिक्स समिट शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति से लेकर आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, व्यापार, डॉलर के विकल्प और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में डिनर की मेजबानी की।

ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दिनों में 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं। सम्मेलन से पहले से लेकर समापन तक भारत ने कई देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। खास बात यह रही कि UAE, सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों के बीच मतभेदों के बावजूद ब्रिक्स के मंच पर सभी एक साथ नजर आए।

पश्चिम एशिया संकट पर भारत की कूटनीतिक पहल

ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी की। ईरान, UAE और सऊदी अरब की मौजूदगी के बीच भारत ने बातचीत और संयम का संदेश दिया। ब्रिक्स देशों ने क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।

आतंकवाद के खिलाफ साझा संदेश

ब्रिक्सघोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया। आतंकी फंडिंग और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने के मुद्दे पर भी चिंता जताई गई। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत वैश्विक कार्रवाई की जरूरत बताई।

मोदी-शी और मोदी-पुतिन मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सीमा पर शांति, व्यापार और सहयोग को लेकर चर्चा हुई। 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात को संबंधों को सामान्य करने की दिशा में अहम कदम माना गया।

वहीं प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन संघर्ष, रणनीतिक सहयोग और व्यापार सहित कई मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं की कार में साथ यात्रा भी BRICS सम्मेलन का खास राजनीतिक और प्रतीकात्मक क्षण रही।

डॉलर के विकल्प और स्थानीय मुद्रा पर जोर

BRICS देशों ने वित्तीय सहयोग बढ़ाने और सीमा-पार लेनदेन में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता को कम करना है।

ग्लोबल साउथ और UNSC सुधार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग दोहराई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के अपने दावे के साथ भारत ने वैश्विक संस्थाओं में बेहतर प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया।

AI से लेकर युवाओं और MSME तक फोकस

BRICS के आर्थिक एजेंडे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा बदलाव, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दे शामिल रहे। इसके अलावा MSME, डिजिटल खेती, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और युवाओं के कौशल विकास में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

चीन 2027 में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। भारत के कार्यकाल के बाद चीन की अध्यक्षता से संगठन के अगले एजेंडे की दिशा भी तय होगी।

समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS को केवल देशों का समूह नहीं बल्कि **समाधान का समूह** बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया को BRICS से उम्मीद है और यह समाधान का एक इकोसिस्टम है। 2026 का BRICS सम्मेलन भारत के लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं सामने रखने का अहम मंच रहा।                                        

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