Boycott China: PM मोदी ने की देशवासियों से स्वदेशी सामान अपनाने की अपील, जानें क्या है वजह?

Boycott China: PM मोदी ने की देशवासियों से स्वदेशी सामान अपनाने की अपील, जानें क्या है वजह?

Boycott China: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर में जनसभा को संबोधित करते हुए सभी देशवासियों से स्वदेशी सामान अपनाने और विदेशी, खासकर चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की। इस अपील के पीछे भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक मंच पर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। पीएम ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए इसे जनबल के साथ जीतने की बात कही, जिससे देश में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिले।

आत्मनिर्भर भारत 
पीएम मोदी ने कहा "हमें गांव-गांव में व्यापारियों को शपथ दिलवानी होगी कि वे कितना भी मुनाफा क्यों न हो विदेशी सामान नहीं बेचेंगे।" उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी में विदेशी उत्पादों के उपयोग पर आत्ममंथन करने को कहा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा "आज छोटी आंखों वाले गणेश जी की मूर्तियां भी विदेश से आ रही हैं। जिनकी आंखें ठीक से खुलती भी नहीं। होली के रंग और दिवाली की सजावट भी विदेशी हो रही हैं।" यह बयान साफ-साफ चीनी उत्पादों पर निशाना साधता है। जो भारतीय बाजारों में बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं।
 
चीन पर निर्भरता कम करने की जरूरत है
भारत और चीन के बीच व्यापारिक असंतुलन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। 2019-20 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 46.8 अरब डॉलर था। जो भारत का किसी भी देश के साथ सबसे बड़ा व्यापार घाटा है। पीएम मोदी की यह अपील आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियानों के लिए है। जिसका उद्देश्य भारतीय निर्माताओं को बढ़ावा देना और विदेशी आयात विशेष रूप से चीन से आने वाले सामानों पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने विशेष रूप से खिलौनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उत्सव से जुड़े सामानों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही जो भारत में बड़े पैमाने पर आयात किए जाते हैं।
 
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
पीएम मोदी की इस अपील का असर बाजारों पर पड़ सकता है। यदि उपभोक्ता और व्यापारी स्वदेशी सामान को प्राथमिकता देते हैं। तो इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों को लाभ मिलेगा। साथ ही यह भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक कदम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की यह अपील न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए है बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव को भी बढ़ावा देती है। 
 

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