Maharashtra News: मुंबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 33 साल के दीक्षित सोलंकी का शव भारत लाया गया। उनका शव लाने के लिए उनका परिवार एयरपोर्ट पहुंचा। वे पहले ऐसे भारतीय नाविक थे जिनकी पिछले महीने ईरान युद्ध के दौरान ओमान के तट के पास हुए एक हमले में जान चली गई थी।
उनके पिता, अमृतलाल, और बहन, मिताली के लिए, यह 35 दिनों के लंबे इंतजार का अंत था। हालांकि, अब सोलंकी परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने पर रोक लगा दी है। उनका कहना है कि कोई भी अंतिम संस्कार करने से पहले, शव की पहचान साबित करने के लिए एक औपचारिक डीएनए टेस्ट होना चाहिए।
डीएनए टेस्ट की मांग कर रहा परिवार
Also read: पंजाब-हरियाणा के मुख्यमंत्री को बम से उड़ाने की धमकी, ग्रेनेड हमला होने की बात कही
डीएनए टेस्ट की मांग सिर्फ दुख की वजह से नहीं है, बल्कि पिछले एक महीने में सामने आए कई खतरों कारण हो रही है। इनमें यह बात भी शामिल है कि जहां बचाए गए दूसरे क्रू मेंबर अपने सामान के साथ लौटे, वहीं दीक्षित का लैपटॉप, फोन और उनकी निजी डायरियां नहीं है। डीएनए टेस्ट की यह मौजूदा मांग, अमृतलाल सोलंकी के उस शक का परिणाम है जो उन्हें शुरू से ही था। दरअसल, एक मार्च को हुए हमले के कुछ ही समय बाद, उन्होंने कहा था कि जब तक वे अपने बेटे की लाश अपनी आंखों से नहीं देख लेते, वे उसकी मौत की खबरों को नहीं मानेंगे।
दीक्षित सोलंकी के पड़ोसी का बड़ा दावा
परिवार का कहना है कि हमले को लेकर उनको पूरा ब्योरा नहीं दिया गया। इसको लेकर परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया और शिपिंग कंपनी के स्पष्टीकरण की मांग की। इसके अलावा दीक्षित सोलंकी जिस महावीर नगर के रहने वाले थे। वहां के लोगों का कहना है कि दीक्षित एक शांत स्वभाव वाला लड़का था। उसकी मां के गुजर जाने के बाद अपने परिवार का पेट पालने के लिए वह दोबारा विदेश में काम करने चला गया था।