महाराष्ट्र चुनाव फिक्सिंग के आरोप पर BJP का पलटवार, CM फडणवीस ने कहा- राहुल को नींद से जागना होगा

Maharashtra Election Fixing: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में धांधली के आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए चुनाव फिक्सिंग के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा पलटवार किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा "राहुल गांधी ने बिहार में अपनी हार मान ली है। जब तक वे जमीन पर नहीं उतरेंगे और तथ्यों को नहीं समझेंगे उनकी पार्टी हारती रहेगी। राहुल को नींद से जागना ही पड़ेगा।"
राहुल गांधी ने अपने एक लेख में 'मैच फिक्सिंग महाराष्ट्र' को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए लिखा कि बीजेपी ने पांच चरणों में रणनीति बनाकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव कर केंद्र सरकार ने प्रक्रिया को अपने पक्ष में किया। साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच 39 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया। जो हिमाचल प्रदेश की कुल आबादी के बराबर है।
बीजेपी का जवाब
मुख्यमंत्री फडणवीस ने राहुल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे मतदाताओं का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा "राहुल को यह नहीं पता कि वे क्या बोल रहे हैं। चुनाव आयोग ने सभी सवालों का जवाब दे दिया है।" बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी X पर लिखा "राहुल गांधी भ्रम के बीज बोने की कोशिश कर रहे हैं।" तो वहीं एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने राहुल पर तंज कसते हुए कहा "विपक्ष के नेता को हल्की बातें नहीं करनी चाहिए। जब वे जीतते हैं तो सब ठीक है लेकिन हारने पर धांधली का आरोप लगाते हैं।"
संजय राउत का हमला
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा "महाराष्ट्र का चुनाव हाइजैक किया गया था। बीजेपी और मोदी ने बोगस वोटरों के जरिए नतीजों को प्रभावित किया।" राउत ने यह भी दावा किया कि अगर महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी होती, तो अडानी के प्रोजेक्ट रद्द हो जाते। एनसीपी (SP) की सुप्रिया सुले ने भी मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया और मांग की कि मतपत्रों से दोबारा चुनाव हो।
चुनाव आयोग पर सवाल
राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष की बार-बार मांग के बावजूद चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का डेटा उपलब्ध नहीं कराया। जिससे संदेह और गहरा हो गया है। उन्होंने कहा हमारी टीम ने मतदाता सूची और मतदान पैटर्न का अध्ययन किया और कई अनियमितताएं पाईं।
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