Jharkhand High Court Decision: झारखंड हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC परीक्षा के जरिए नियुक्त सरकारी कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने का आदेश दिया गया था। कोर्ट के इस फैसले से उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नौकरी पर सरकार के आदेश के बाद संकट खड़ा हो गया था। झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को एक नोटिफिकेशन जारी कर 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इनमें 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा भी शामिल थी। इन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर कई हफ्तों से छात्रों और अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन चल रहा था।
हाईकोर्ट ने सुनी दलीलें
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की बेंच में हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। कोर्ट ने फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए 15 सितंबर तक का समय दिया है। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी।
CID को सौंपी है जांच- जस्टिस दीपक रोशन
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रोशन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने खुद पूरे मामले की जांच CID को सौंपी है, तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को स्थायी नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। याचिकाकर्ताओं के वकील कुमार हर्ष और अमृतांश वात्स ने कोर्ट को बताया कि मामले में अभी तक न तो FIR दर्ज हुई है और न ही कोई विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। कोर्ट ने पूछा कि क्या इस मामले में कोई फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट है और क्या केवल एक सरकारी आदेश जारी करके नियमित नियुक्ति को रद्द किया जा सकता है।
आम लोगों को भी हो रही परेशानी- कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त कई पुलिस अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर देवघर में श्रावणी मेला ड्यूटी पर तैनात हैं। अचानक उनकी सेवाएं खत्म करने से आम लोगों को भी परेशानी हो रही है। इस फैसले के बाद झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही सरकार की मंशा पर संदेह था। मरांडी ने आरोप लगाया कि छात्रों का आंदोलन खत्म कराने के लिए सरकार ने बातचीत का भरोसा दिया और बाद में अचानक परीक्षाओं व नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला कर दिया।
छात्रों को नुकसान पहुंचा रही सरकार- मरांडी
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार गलत तरीके से हुई नियुक्तियों की जांच कराने के बजाय पूरे मामले में छात्रों को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग रही है कि CBI जांच के जरिए गलत नियुक्तियों के लाभार्थियों और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए, जबकि पारदर्शी तरीके से चयनित उम्मीदवारों की नौकरी सुरक्षित रखी जाए। फिलहाल हाईकोर्ट की रोक के बाद JPSC और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियों से जुड़े कर्मचारियों को राहत मिली है। अब 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार का जवाब सामने आएगा और मामले की आगे की दिशा तय होगी।
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