Haryana Land Pooling Policy: हरियाणा सरकार ने औद्योगिक विकास को तेज करने के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। इस नई नीति का मकसद किसानों, उद्योगों और सरकार तीनों को फायदा पहुंचाना है। सरकार ने इसे “किसान-भागीदारी आधारित औद्योगिक विकास मॉडल” के रूप में पेश किया है। नई नीति के तहत अब राज्य में बनने वाली सभी इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) में किसानों की सीधी भागीदारी होगी। पहले जहां किसान अपनी जमीन देकर केवल मुआवजा लेते थे, अब उन्हें विकसित जमीन में 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यानी किसान भी औद्योगिक क्षेत्र के साझेदार बनेंगे और भविष्य में बढ़ती जमीन की कीमत का फायदा उठा सकेंगे।
बैठक में मिली इस नीति को मंजूरी
इस फैसले को नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मंजूरी दी गई। बैठक में राव नरबीर सिंह, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के सुझाव के आधार पर यह तय किया गया कि किसानों को भागीदार बनाने से जमीन की कमी नहीं होगी और प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो सकेंगे। सरकार ने राज्य में 10 नई IMT बनाने की योजना बनाई है। इनमें हिसार, सोहना, नारनौल, रोहतक, सिरसा, पलवल, अंबाला, नारायणगढ़, जींद और रेवाड़ी शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट जींद में प्रस्तावित है, जो करीब 12 हजार एकड़ में बनेगा।
कैसी होगी नई नीति?
नई नीति को समझने के लिए एक उदाहरण लें अगर किसी किसान की एक एकड़ जमीन है, तो उसमें से कुछ हिस्सा सड़क, बिजली और अन्य सुविधाओं में लगेगा। बची हुई जमीन का आधा हिस्सा किसान को विकसित प्लॉट के रूप में वापस मिलेगा। यानी किसान को करीब 1200 से 1250 वर्ग मीटर विकसित जमीन दी जाएगी। इस नीति की खास बात यह है कि किसानों को विकल्प दिया गया है। वे चाहें तो बाजार दर पर मुआवजा ले सकते हैं या फिर विकसित प्लॉट ले सकते हैं। प्लॉट को छोटे या बड़े हिस्सों में लेने की भी आजादी होगी।
सरकार का मानना है कि इस नई नीति से किसानों की आय बढ़ेगी, जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे और राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और हरियाणा निवेश के लिए और आकर्षक बनेगा।
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