
नई दिल्ली: हमारी धरती रहस्यों से भरी हुई है, यहां कदम-कदम पर ऐसे राज़ छिपे हुए है जिनके बारे में जानकर लोगों को हैरानी होती है। ऐसे ही के रहस्य का खुलासा सालों पहले हुआ था, जिसमें यह बताया गया था कि साल 1937 में तिब्बत और चीन के बीच एक ऐसी गुफा मिली थी जिसने करोड़ों लोगों के मन में कई सवाल उठा दिए थे। इसके अलावा आज तक कोई भी इस रहस्य का पता नहीं लगा पाया है।
बात दें कि साल 1937 में तिब्बत और चीन के बीच बोकाना पर्वत की एक गुफा में 716 पत्थर के रिकार्डर मिले थे। वहीं महावीर से 10हजार साल पुराने यानी आज से कोई साढ़े 13हजार साल पुराने। ये रिकॉर्डर बड़े आश्चर्य के हैं, क्योंकि ये रिकॉर्डर ठीक वैसे ही हैं, जैसे ग्रामोफोन का रिकॉर्ड होता है। ठीक उसके बीच में एक छेद है और पत्थर पर ग्रूव्ज है, जैसे कि ग्रामोफोन के रिकॉर्ड पर होते हैं। अब तक राज नहीं खोला जा सका है कि वे किस यंत्र पर बजाए जा सकेंगे।
वहीं रूस के एक बड़े वैज्ञानिक डॉ. सर्जीएव ने वर्षों तक मेहनत करके यह प्रमाणित कर दिया है कि वे हैं तो रिकॉर्ड ही। किस यंत्र पर और किस सुई के माध्यम से वे पुनर्जीवित हो सकेंगे, यह अभी तय नहीं हो सका। अगर एकाध पत्थर का टुकड़ा होता तो सांयोगिक भी हो सकता है। 716 हैं। सब एक जैसे, जिनमें बीच में छेद हैं। सब पर ग्रूव्ज है और उनकी पूरी तरह सफाई धूल-ध्वांस जब अलग कर दी गई और जब विद्युत यंत्रों से उनकी परीक्षा की गई, तब बड़ी हैरान हुई। उनसे प्रति पल विद्युत की किरणें विकिरणित हो रही हैं। लेकिन क्या आदमी के आज से 12 हजार साल पहले ऐसी कोई व्यवस्था थी कि वह पत्थरों में कुछ रिकॉर्ड कर सके? तब तो हमें सारा इतिहास और ढंग से लिखना होगा।
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