अहोई अष्टमी व्रत इन बातों का रखें विशेष ध्यान, जानें व्रत का मुहूर्त, पूजा विधि और शुभ योग

अहोई अष्टमी व्रत इन बातों का रखें विशेष ध्यान, जानें व्रत का मुहूर्त, पूजा विधि और शुभ योग

नई दिल्ली: आज 17 अक्टूबर है, यानि अहोई अष्टमी व्रत का दिन। यहा व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। महिलाएं इस दिन संतान के लिए निर्जला व्रत करती हैं।  इस दिन संध्याकाल में शंकर पार्वती और अहोई माता की पूजा करती है। स्त्रियां वंश वृद्धि और बच्चे की सुखी जीवन की कामना के लिए इस व्रत को सूर्योदय से सूर्यास्त तक करती है और फिर तारों को देखने के बाद ही व्रत खोलती है। कुछ जगह चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोले जाने की परंपरा भी हैं।

आइए जानते हैं, अहोई अष्टमी का मुहूर्त, पूजा विधि, शुभ योग

अहोई अष्टमी 2022 मुहूर्त

कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि शुरू - 17 अक्टूबर 2022, सुबह 09.29

कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि समाप्त - 18 अक्टूबर 2022, सुबह 11.57

अहोई पर तारे निकलने का समय

इस साल अहोई अष्टमी सोमवार, 17 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 29 मिनट से लेकर मंगलवार, 18 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। अहोई अष्टमी पर तारे देखकर अर्घ्य देने का विधान है। तभी ये व्रत संपन्न माना जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि अहोई अष्टमी पर आज शाम 06 बजकर 13 मिनट पर तारे निकलेंगे।

अहोई अष्टमी 2022 शुभ योग

अहोई अष्टमी 2 शुभ योग शिव, सिद्धि योग में मनाई जाएगी।

शिव योग - 16 अक्टूबर 2022, दोपहर 03.09 - 17 अक्टूबर 2022, दोपहर 04.02

सिद्ध योग - 17 अक्टूबर 2022, शाम 04.02 - 18 अक्टूबर 2022, शाम 04.53

अहोई अष्टमी पूजा विधि

अहोई अष्टमी के दिन दोपहर के समय हाथ में गेंहू के सात दाने और कुछ दक्षिणा लेकर अहोई की कथा सुनें। फिर अहोई माता की आकृति गेरूआ या लाल रंग से दीवार पर बनाएं। सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर माता के चित्र के सामने जल से भरा कलश, दूध-भात, हलवा, पुष्प और दीप प्रज्वलित करें। पहले अहोई माता की रोली, पुष्प, दीप से पूजा करें। उन्हें दूध भात अर्पित करें। फिर हाथ जोड़कर माता से अपनी संतान की दीर्घायु और मंगलकामना की प्रार्थना करें। अब चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करें।

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