नवरात्रि के मौके पर अनोखी परंपरा, महिलाओं की जगह पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा

नवरात्रि के मौके पर अनोखी परंपरा, महिलाओं की जगह पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा

अहमदाबाद: देश में आज से नवरात्रि त्योहार शुरू हो चुका हैं, देवी की आराधना के लिए जगह-जगह पंडाल सजा कर तैयार हो गए है। नवरात्रि के नौ दिनों में लोग अपने दोस्तों परिवारों के साथ देवी की पूजा अर्चना करेंगे, साथ ही शाम में डांडिया का भी लुफ्त लेंगे। इस दिन सभी महिलाएं पारंपरिक कपड़े पहनना ज्यादा पसंद करती हैं। अगर हम आपकों बोले कि देश में एक ऐसी भी जगह हैं कि जहां पुरुष भी सज-सवकर तैयार होते है और मां की पूजा अर्चना करते है, साथ ही पंड़ाल में डांडिया भी खेलते हैं। 

बता दे, नवरात्रि में गुजरात के अहमदाबाद में 200 साल पुरानी एक परंपरा निभाई जा रह है। जहां बड़ौत समुदाय के पुरुष नवरात्रि में साड़ी पहनकर गरबा करते हैं। ये परंपरा वाकई अपने आप में खास है। बताया जाता है कि सादुबा नाम कि एक महिला ने बड़ौत समुदाय के पुरुषों को एक श्राप दे दिया था। उन्हीं को खुश करने के लिए मंदिर में पूजा-अर्चना होती है और पुरुष साड़ी पहनकर गरबा करते हैं। बताया जाता है कि गरबा के इस त्यौहार में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। और खुशी से इस परंपरा को निभाते हैं।

पुरुष का शेरी गरबा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों द्वारा साड़ी पहनकर जो परंपरा निभाई जाती है उसे शेरी गरबा कहा जाता है। यहां पर सादु माता के मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद नवरात्रि के आठवें दिन रात के समय यह गरबा किया जाता है। गरबा करने के लिए एकत्रित होने वाले बड़ौत समुदाय के अलावा यहां भारी संख्या में लोग इस गरबा को देखने के लिए पहुंचते हैं। इस अनोखी परंपरा को जो भी देखता है वह हैरान हो जाता है।

पुरुष साड़ी का इतिहास

धार्मिक मान्यताओं में यही कहा जाता है कि 200 साल पहले इस समुदाय को मिले शाप से बचने के लिए नवरात्रि में उसका प्रायश्श्रिप कर पुरुष महिलाओं की तरह तैयार होकर माता की पूजन अर्चन कर नृत्य आराधना कर उनसे माफी मांगते हैं। आधुनिक हो चुके इस जमाने में भी अहमदाबाद के बड़ौत समुदाय ने अपनी 200 साल पुरानी ये परंपरा को आज भी जीवित रखा हुआ है।

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