WORLD SUICIDE DAY: क्यों बढ़ रहे है आत्महत्या के आंकड़े , डरा रही है 2021 की रिपोर्ट

WORLD SUICIDE DAY: क्यों बढ़ रहे है आत्महत्या के आंकड़े , डरा रही है  2021 की रिपोर्ट

नई दिल्ली: आत्महत्या यहां सिर्फ एक शब्द नहीं हैं, ये लोगों का खुद से हार जाने का डर हैं, आत्मविश्वास अंदर से मर जाने का डर है। जब हमको ऐसे लगे की हम अपना सब हार गए है तब हमको इस तरह के ख्याल मन में आते हैं। मन करता है कि बस खुद को किसी तरह खत्म कर लें। आज यानि 10 सितम्बर को दुनिया भर में वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे (world suicide prevention day) मनाया जाता है। इसका उद्देशय लोगों को आत्महत्या से बचा कर, उन्हें जागरुक कराना है।

एनसीआरबी के रिकॉर्ड के अनुसार दुनिया भर में 2019-2021 तक, 17.56 लाख लोगों ने अपने जीवन को खत्म किया, इसमें 4.7 करोड़ महिलाएं जिनकी आयु 54 साल से अधिक हैं, उन्होनें अलग-अलग कारण की वजह से अपनी जान ले ली। एनसीआरबी की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है, जहां भारत में आत्महत्या की दर 1998 से खतरनाक अनुपात पर आ गई जिसमें 43,027 महिलाओं सहित 104,713 लोगों ने खुद को फांसी लगा ली। एनसीआरबी के एक रिपोर्ट के अनुसार "1998 में आत्महत्याओं में वृद्धि की दर तेजी से बढ़ने लगी है। उस वर्ष एक रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में आत्महत्याओं की संख्या छह अंकों में चली गई थी। बाद में 2009 में, पिछले वर्षों में कुछ छोटे बदलावों के साथ आत्महत्याओं की संख्या बढ़कर 110,587 हो गई।"

लगातार बढ़ती संख्या के साथ देश में 2021 में अत्महत्या दर1,65,033दर्ज की गई। जो देश के लिए घातक साबित हो सकती है। कोरोना काल झेल रहे लोगों में मानसिक तनाव, परिवारिक तथा साथ-साथ अन्य जुड़े समस्या से लोग दिन पर दिन जूज रहे हैं। जिसकी वजह से अपनी जान गवा रहे हैं। देश में  2021 में आए चौकाने वाले है।  ये आकड़े अव तक के सवसे ज्यादा दर्ज किए जाने वाले आंकड़े में से हैं।    

2022 की आत्यमहत्या थीम है

इस वर्ष यानी वर्ष 2022 के लिए विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम ‘Creating hope through action’ यानी “लोगों में अपने काम के जरिए उम्मीद पैदा करना” रखी गई है। इस दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रम इसी थीम पर आधारित होंगे। इस थीम के माध्यम से विश्व स्वास्थ्य संगठन ये संदेश देना चाहता है, कि आत्महत्या करने की सोच रखने वालों को किसी भी तरह से अपनी उम्मीद नहीं छोड़नी चहिए है

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (IASP) ने की थी।इस दिन को वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ एंड वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन द्वारा स्पॉन्सर्ड(sponsored)किया जाता है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस को मनाने कापहला वर्ष सफल रहा था।इसी वजह से वर्ष 2004 में डब्ल्यूएचओ औपचारिक रूप से इस आयोजन को फिर से को-स्पॉन्सर करने के लिए तैयार हुआ था।जिसकी वजह से ये दिन एक वार्षिक मान्यता प्राप्त दिन (Annually Recognized Day) बन गया।

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