'दंगाइयों को कुचल...', ईरान में मचे बवाल पर सुप्रीम लीडर खामेनेई सख्त; विदेशी साज़िश का लगाया आरोप

'दंगाइयों को कुचल...', ईरान में मचे बवाल पर सुप्रीम लीडर खामेनेई सख्त; विदेशी साज़िश का लगाया आरोप

Khamenei On Iran Protests Violence: ईरान में चल रहे आर्थिक विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने सख्त रुख अपनाते हुए 'दंगाइयों' को उनकी जगह दिखाने का आदेश दिया है। 03 जनवरी को तेहरान में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने प्रदर्शनकारियों और दंगाइयों के बीच फर्क करते हुए कहा कि अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाहिए, लेकिन दंगाइयों से कोई फायदा नहीं। उन्होंने इसे विदेशी ताकतों, विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल की साजिश बताया।

दंगाइयों' को बख्शा नहीं जाएगा - खामेनेई

खामेनेई ने अपने बयान में स्पष्ट कहा 'प्रदर्शन वैध है, लेकिन प्रदर्शन और दंगे अलग हैं। अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाहिए। लेकिन दंगाइयों से बात करने का कोई फायदा नहीं है। इसलिए उनको उनकी जगह दिखानी चाहिए।' उन्होंने मुद्रा की गिरावट और आर्थिक अस्थिरता को 'दुश्मन' का काम बताते हुए कहा कि कुछ लोग दुश्मन द्वारा उकसाए या किराए पर लिए गए हैं, जो दुकानदारों और व्यापारियों के पीछे छिपकर इस्लाम, ईरान और इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। उन्होंने अमेरिका को क्षेत्र से बाहर करने की बात दोहराई और कहा कि अमेरिका को जाना होगा।

बता दें, खामेनेई का यह भाषण देश में एक सप्ताह से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बाद आया, जो 28 दिसंबर 2025 से तेहरान के बाजारों से शुरू हुए और पूरे देश में फैल गए, जहां लोग सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं और महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर होती अर्थव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे है।

ईरान में क्यों हो रहे है प्रदर्शन?

दरअसल, प्रदर्शनों का मुख्य कारण ईरान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था है, जहां रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिस वजह से महंगाई 52 प्रतिशत तक बढ़ गई है और भोजन की कीमतों में उछाल आया है। इसके विरोध में दुकानदारों और व्यापारियों ने हड़ताल की, जो छात्रों और अन्य समूहों तक फैली। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों द्वारा गोलीबारी, आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कम से कम 8 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। जबकि 130 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

वहीं, अब खामेनेई के बयान को सुरक्षा बलों के लिए हरी झंडी माना जा रहा है, जो पहले भी 2019 के ईंधन विरोध और 2022 के 'महिला, जीवन, आजादी' आंदोलन में सख्त कार्रवाई कर चुके हैं, जहां सैकड़ों मौतें हुईं। सरकार ने आर्थिक मुद्दों को हल करने का वादा किया है, लेकिन दंगाइयों पर कोई नरमी नहीं दिखाई।

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