मिडिल ईस्ट में 'Energy War' की आहट, ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद क़तर और UAE बने निशाना

मिडिल ईस्ट में 'Energy War' की आहट, ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद क़तर और UAE बने निशाना

Middle East Energy War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब पूरी तरह 'तेल युद्ध' में बदल चुका है। इज़रायल ने दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमले किए। जिसके ठीक बाद ईरान ने भी कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख तेल-गैस केंद्रों पर मिसाइलें और ड्रोन छोड़े। जिस वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 110डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं और यूरोप में गैस कीमतें 9प्रतिशत तक उछल गईं। 

बता दें, ईरान और कतर के बीच साझा साउथ पार्स/नॉर्थ फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा नेचुरल गैस फील्ड है। लेकिन इज़रायल के हमले में यहां ईरानी हिस्से पर भारी नुकसान हुआ और आग लग गई। तो वहीं, ईरान की सेना ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उसके ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ तो वह 'आक्रामक देशों' के तेल-गैस ठिकानों को निशाना बनाएगी।

कतर-UAE के तेल-गैस केंद्रों पर ईरान का हमला

जिसके चलते ईरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख तेल-गैस केंद्रों पर मिसाइलें और ड्रोन से हमले किए। कतर की राज्य कंपनी क़तरएनर्जी ने बताया कि रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी (दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब) पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल ने हमला किया, जिससे यहां आग लग गई और बहुत नुकसान हुआ। क़तर ने LNG प्रोडक्शन फिलहाल के लिए रोक दिया है, जो ग्लोबल सप्लाई का 20प्रतिशत हिस्सा है।

दूसरी तरफ, ईरान ने UAE पर भी हमले किए और अल होस्न गैस फील्ड, हबशान और बाब फील्ड को निशाना बनाया गया। UAE सरकार ने इसे खतरनाक वृद्धि बताया और कुछ सुविधाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इसके अलावा सऊदी अरब के रास तनुरा रिफाइनरी और जुभैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर भी खतरा मंडरा रहा है।

आर्थिक झटका और वैश्विक असर

इस ऊर्जा युद्ध ने तेल और गैस बाजार को हिला दिया है। होर्मुज स्ट्रेट (जिससे दुनिया का एक-पांचवां तेल गुजरता है) लगभग बंद हो गया है। यूरोप और एशिया में गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। क़तर ने पहले ही फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है, यानी सप्लाई अनुबंधों को पूरा करना असंभव हो गया है।

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