
Haryana Heart Attack Deaths: हरियाणा विधानसभा में बुधवार को एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य सरकार ने बताया कि जनवरी 2020से जनवरी 2026तक 18-45वर्ष की आयु वर्ग के करीब 17,973लोगों की मौत हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से हुई है। यह आंकड़ा औसतन रोजाना करीब 8युवाओं की मौत के बराबर है।
हार्ट अटैक से हुई मौतें
बता दें, कांग्रेस विधायक के सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर वर्षवार आंकड़े पेश किए। जिसमें स्पष्ट रूप से युवा वर्ग पर हृदय रोगों का बढ़ता बोझ दिख रहा है।
2020में 2,394
2021में 3,188
2022में 2,796
2023में 2,886
2024में 3,063
2025में 3,255
जनवरी 2026में 391
यानी कुल मिलाकर 17,973मौतें दर्ज की गईं। आंकड़ों में 2021के बाद उतार-चढ़ाव के बावजूद कुल संख्या में वृद्धि का रुझान साफ दिखता है। हालांकि, सरकार ने साफ किया कि इन मौतों और कोविड-19संक्रमण या वैक्सीनेशन के बीच किसी सीधे संबंध का कोई अध्ययन या सर्वेक्षण नहीं किया गया है।
क्यों बढ़ रही हैं युवाओं में हार्ट अटैक की घटनाएं?
कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली हैं। अनियमित और असंतुलित भोजन, फास्ट फूड का अधिक सेवन, शारीरिक व्यायाम की पूरी कमी, लगातार तनाव, धूम्रपान, शराब, मोटापा, अनियंत्रित डायबिटीज और उच्च रक्तचाप प्रमुख कारक बने हुए हैं। कोविड महामारी के बाद हृदय संबंधी जटिलताओं में भी वृद्धि देखी गई, लेकिन इसका सटीक संबंध अभी सिद्ध नहीं हुआ है। कुछ जिलों जैसे यमुनानगर, रोहतक, हिसार और नूंह में यह समस्या और गंभीर बताई जा रही है। पहले 40-50वर्ष की उम्र के बाद आम यह बीमारी अब 25-35वर्ष के युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया और सलाह
हरियाणा सरकार ने युवाओं में हृदय रोगों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रीनिंग तथा ईसीजी सुविधाएं मजबूत करने की बात कही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, रोजाना कम से कम 30-45मिनट व्यायाम, तनाव प्रबंधन, धूम्रपान-शराब से परहेज और वजन नियंत्रण सबसे प्रभावी बचाव है। तो वहीं, सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक थकान या चक्कर आने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेने की अपील की गई है। देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
लेकिन यह आंकड़े हरियाणा ही नहीं, पूरे देश में युवा स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जीवनशैली में तुरंत सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और बिगड़ सकती है। सरकार अब इन मौतों के गहन कारणों का पता लगाने और प्रभावी रोकथाम की रणनीति बनाने पर जोर दे रही है।
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