Trump Cancels Peace Deal:मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की स्थिति गंभीर हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ शांति समझौते अब पूरी तरह टूट चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच फिर टकराव की स्थिति बनी हुई है।
अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पलटवार किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर एक बार फिर गैस और तेल की भारी किल्लत होने की आशंका बढ़ गई है। हालिया विवाद की शुरुआत तब हुई जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया। इनमें कतर का एक एलएनजी टैंकर और सऊदी अरब का एक तेल टैंकर शामिल था।
अमेरिका का ईरान पर हमला
अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान की वायु रक्षा प्राणलियों, रडार साइटों, एंटी शिप मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों पर बम बरसाए। ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर बुशहर में भी कई धमाकों की पुष्टी हुई है। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, होर्मुज के जहाजों हर हमले के बाद अमेरिका ने इसे सजा के तौर पर अंजाम दिया है। यह कार्रवाई पिछले हफ्ते की तुलना में 4-5 गुना ज्यादा शक्तिशाली थी। हमले के बाद ईरान के बंदर अब्बास, सिरीक और केशम द्वीप पर कई धमाकों की आवाज सुनी गई।
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ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई
इसके तुरंत बाद ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागी हैं। बहरीन और कुवौत में मिसाइल अलर्ट सायरन बजने की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की रिवोल्यनशनरी गार्ड्स का कहना है कि उसने बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। जिसमें बहरीन का ईसा एयरबेस भी शामिल है। आईआरजीसी ने बुशहर प्रांत के ऊपर अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है।