
नई दिल्ली: स्वस्थ शरीर के लिए भोजन और पानी को सीमित और सही समय पर पीने की बात कहीं जाती हैं। वहीं आपने अपने बड़ो के मुंह से सुना होगा कि पानी को हमेशा बैठकर पीना चाहिए कहा जा रहा हैं कि बैठकर पानी पीने से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है और खड़े होकर पानी सीधा घुटनों में जाता हैं जिसके बाद एक समय में पानी घुटनों में जमा हो जाता हैं और शरीर में बीमारी होने का खतरा बढ़ने लगता हैं। अगर पानी बैठकर पीना चाहिए तो हम सोचते है कि पीने की सभी चीजें बैठकर ही पीनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हैं दूध को हमेशा खड़े होकर पीने की बात कही जाती हैं ऐसा क्यों? तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
खड़े होकर पीना चाहिए दूध
दरअसल खड़े होकर दूध पीने से ये शरीर के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुंच पाता है और जल्दी अवशोषित होने लगता है। इससे शरीर को सभी न्यूट्रिएंट्स मिल पाते हैं। वहीं अगर बैठकर दूध पीते हैं तो ये पोजीशन स्पीड ब्रेकर की तरह काम करती है और दूध धीरे-धीरे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में जाता है। बैठकर दूध पीने से ये ऐसोफेगस के निचले हिस्से में ठहर जाता है। इतना ही नहीं अगर ये प्रकिया लंबे वक्त तक जारी रही तो गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स सिंड्रोम जैसी परेशानी पैदा हो सकती है।
बैठकर पीना चाहिए पानी
वहीं अगर आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो इससे आपको एसिडिटी, गैस, गाठिया आदि की परेशानी हो सकती है।अगर हम बैठकर पानी पीने से ये शरीर के सभी हिस्सों तक अच्छे से पहुंचता है। शरीर को पानी की जितनी आवश्यकता होती है उतना पानी शरीर अच्छे से अब्सॉर्ब कर लेता है और बाकी टॉक्सिन यूरिन के जरिए बाहर कर देता है। बैठकर पानी पीने से खून में हानिकारक तत्व नहीं घुलते और खून साफ रहता है।
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