कोरोना से रिकवरी होने के बाद लोगों को क्यों आ रहे हार्ट अटैक, क्या है इसके लक्षण

कोरोना से रिकवरी होने के बाद लोगों को क्यों आ रहे हार्ट अटैक, क्या है इसके लक्षण

नई दिल्ली:  कोरोना महामारी के बाद भी लोगों काफी अन्य बीमारियों से घिर गए है। साथ ही कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों में हार्ट अटैक की समस्या भी उत्पन्न हो गई है। कोरोना से रिकवरी होने के बाद काफी लोगों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा है। कोरोना वायरस लम्बे समय तक खून को गाढ़ा रखाता है। रिकवर होने के बाद भी ये समस्या देखी जा रही है।

विशेषज्ञों के पास ऐसे एक-दो नहीं, बल्कि कई-कई मामले पहुंच रहे हैं, अमेरिका में हुई एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि संक्रमण से रिकवरी के बाद भी मरीजों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का खतरा हो रहा है। दिसंबर की तुलना के अनुसार 30 प्रतिशत मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया कि सालों के एक्सपीररियंस में अचानक इतने मामले पहली बार देखे गए है।  

ऐसे मरीज़ों का इलाज कर रहे डॉक्टर कोविड का कनेक्शन मान रहे हैं। क्यूंकि कोरोना खून को गाढ़ा करता है और शरीर में खून की गठे बन जाती है। इसके चलते दिल की नसे भी ब्लॉक  हो जाती हैं तो कहीं लोग अचानक हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं। कोविड से ठीक हुए मरीजों में भी अचानक हार्ट अटैक की समस्या उत्पन्न हो रही है।

वैज्ञानिकों ने यह भी  बताया कि वो मरीज जो कोरोना संक्रमण होने के 30 दिन के अंदर ठीक हो गए, उन्हें हार्ट स्ट्रोक का खतरा 1.5 गुना बढा है। साथ ही उनमें हार्ट अटैक का खतरा 1.6 गुना और हार्ट फेलियर का खतरा 1.7 गुना बढ़ा गया है। इसके अलावा ऐसे मरीज जिनकी दिल की धड़कनें अनियमित होने का खतरा 1.6 गुना और हार्ट में सूजन का खतरा दोगुना बढा है।

एक रिसर्च मे पता चला है कि कोरोना के दौरान लोगों को हृदय रोग का खतरा होता है, यह पहली ऐसी रिसर्च है जो कोरोना मरीजों में रिकवरी के बाद इस बीमारी के खतरे को दिखाती है।एक  रिसर्च में हार्ट संबंधी बीमारियों का जोखिम सभी उम्र के लोगों में समान पाया गया है। यहां तक कि मोटापे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रोल और किडनी की बीमारी से पीड़ित ग्रास्त लोगों में भी कोरोना रिकवरी के बाद दिल की बीमारियों का खतरा समान देखा गया है।  

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