Assam Flood: आखिर क्यों असम के लिए हर साल आफत बनता है बाढ़, जानें

Assam Flood: आखिर क्यों असम के लिए हर साल आफत बनता है बाढ़, जानें

Assam Flood Explained: असम, एक ऐसा राज्य जो अपनी प्राकृतिक सुदंरता और नदियों के लिए जाना जाता है लेकिन मानसून आते ही हर साल असम के लोगों पर बाढ़ कहर बरपाती है और काफी नुकसान पहुंचाती है आखिर क्या है असम में हर साल बाढ़ आने का कारण? क्या इसके लिए सिर्फ प्रकृति जिम्मेदार है या फिर मनुष्यों का भी कोई हाथ है? इसी के बारे में आज हम आपको बताएंगे

असम में लाखों लोग बाढ़की विभीषिका झेल रहे हैं। असम के 12 जिलों के 5 लाख लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से कई नए इलाके जलमग्न हो गए हैं। असम में हर साल इस समय के आसपास जनजीवन पूरी तरह से ठप हो जाता है। लोग लगातार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। इन आपदाओं की तीव्रता लगातार बढ़ रही है, जिससे जानमाल के नुकसान में भी वृद्धि हो रही है।

असम का बाढ़ प्रभावित हिस्सा भारत के कुल बाढ़ प्रभावित हिस्सों का दस फीसदी हिस्सा है। इस समस्या की प्रमुख वजह प्रदेश की भौगोलिक स्थिइति और प्राकृतिक भूभाग में है। असम की प्रमुख नदी ब्रह्मपुत्र नदी को प्रदेश की 50 सहायक नदियां पानी देती हैं जिसके कारण हर साल ये नदी बहुत ही विकराल रूप ले लेती है।ऐसा कहा जाता है कि असम में हर साल आने वाली बाढ़ के लिए असम और उसके आस-पास के इलाकों के साथ-साथ यहां की जलवायु भी जिम्मेदार है। ब्रह्मपुत्र नदी अमेजन के बाद दुनिया की दूसरी ऐसी नदी है जो अपने साथ सबसे ज्यादा पानी और अवसाद बहा कर लेकर आती है जिससे हर साल निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।असम के आसपास का इलाका भी यहां बाढ़ के लिए मददगार होता है। अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के पहाड़ों  से होकर यह नदी नीचे की ओर बहती है। इन दोनों राज्यों में मानसून में भारी वर्षा होती है क्योंकि यहां के पहाड़ दक्षिण की ओर और बंगाल की खाड़ी से बारिश के बादल आते हैं। असम ऐसे चमर मौसमी घटनाओं को झेलने की स्थिति में नहीं होता है और नतीजा बाढ़ आती है। वहीं पश्चिम असम में भूटान की वजह से यहां पानी बाढ़ के हालात बना देता है।

लेकिन अगर आप सोच रहे है कि असम में बाढ़ के लिए सिर्फ प्रकृति जिम्मेदार है तो आप गलत है क्योंकि असम में, नदी तटों और झीलों का अतिक्रमण बाढ़ की स्थिति को खराब करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है। नदी के किनारे अनियोजित मानव बस्तियाँ, कृषि गतिविधियाँ और बुनियादी ढाँचे का विकास भारी वर्षा के दौरान पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करता है। जिसके वजह से हर साल बाढ़ आती है।

इसके अलावा राज्य भर में अपर्याप्त जल निकासी बुनियादी ढांचे के कारण असम की बाढ़ की संवेदनशीलता और भी बढ़ गई है। शहरी क्षेत्रों में अपर्याप्त या बंद नालियां पानी की तेजी से निकलने को रोकती हैं, जिसके वजह से जलभराव होता है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

इसके साथ ही असम में तीव्र और अनियोजित शहरी विकास ने बार-बार आने वाली बाढ़ में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जैसे पूरी तरह से जमीन का उपयोग की योजना बनाए बगैर शहरों और कस्बों का विस्तार होता है,औरबाढ़ शमन उपायों के लिए आवश्यक विचारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इमारतों, सड़कों और बुनियादी ढाँचे का बेहिसाब विकास और निर्माण गतिविधियाँ कारण बनती हैं क्षेत्र में बाढ़ का।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक रणनीतियों की जरुरत है जो विकास, नदी तट संरक्षण, बेहतर जल निकासी बुनियादी ढांचे और प्रभावी भूमि-उपयोग योजना को प्राथमिकता दें। केवल ठोस प्रयासों से ही असम,बाढ़ के विनाशकारी प्रभाव को कम कर सकता है और अपने निवासियों के जीवन और आजीविका की रक्षा कर सकता है।

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