
Chamoli Glacier Burst: उत्तराखंड के चमोली में शुक्रवार 28 फरवरी को आए भयंकर एवलांच में 55 मजदूर फंस गए थे। जिनमें से कुल 46 लोगों को सुरक्षित निकाला गया हैं। जबकि 4 घायल मजदूरों की मौत हो गई हैं। वहीं, 5 मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू में सेना के 4 हेलिकॉप्टर्स की मदद ली हैं। इसके अलावा BRO, SDRF और NDRF के 200 से ज्यादा जवान बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
लापता मजदूरों को बचाने के लिए सर्त अभियान जारी हैं। उनका पता लगाने के लिए दिल्ली से ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मंगाया गया है। जो अब माणा गांव पहुंच गया है।
मौसम बना रुकावट
दरअसल, एवलांच में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए भारतीय सेना समेत NDRF के जवान लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। लेकिन भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में कई मुश्किलें आ रही हैं। वहीं, मौसम विभाग ने आज इलाके में मौसम साफ रहने की उम्मीद जताई है। जिससे राहत-बचाव अभियान में तेजी आ सकती है।
लापता मजदूरों के लिए भेजे गए हेलिकॉप्टर्स
बताया जा रहा है कि लापता मजदूरों की तलाश के लिए एक खास तरह का हेलिकॉप्टर घटनास्थल के लिए रवाना हुआ है। SDRF की एक विशेषज्ञ टीम को विक्टिम लोकेटिंग कैमरा (VLC) एवं थर्मल इमेज कैमरा के साथ हेलिकॉप्टर की मदद से घटनास्थल भेजा गया है। VLC की मदद से लापता मजदूरों को खोजने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा DIBOD सिस्टम (ड्रोन आधारित इंटेलिजेंट बरीड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन) सिस्टम समेत कई तकनीकी मशीनों की मदद ली गई हैं। इस सिस्टम को बर्फ के नीचे फंसे मजदूरों का पता लगाने के लिए लगाया जाएगा।
कैसे हुए हादसा?
दरअसल, उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव में 28 फरवरी की सुबह करीब 7:15 बजे हिमस्खलन की चपेट में आने से BRO के लिए काम कर रहे 55 मजदूर बर्फ के नीचे फंस गए। बता दें, सभी मजदूर आठ कंटेनरों और एक शेड के अंदर सो रहे थे। तभी अचानक ये हादसा हो गया। जिसके बाद राहत-बचाव कार्य शुरु किया गया। बचाव अभियान में 10 मजदूरों को बचा लिया गया था। इसके बाद अन्य मजदूरों का काम शुरु किया गया।
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