जलती चिताओं के बीच मणिकर्णिका घाट पर खेली गई भस्म होली, विदेशी टूरिस्ट भी हुए सराबोर

जलती चिताओं के बीच मणिकर्णिका घाट पर खेली गई भस्म होली, विदेशी टूरिस्ट भी हुए सराबोर

Masan Holi 2025: देशभर में होली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। हर जगह सिर्फ रंगों में ही रंगे लोग नजर आते हैं। लेकिन वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की होली काफी हटके है। जैसे बरसाना और नंदगांव में लट्ठमार होली खेली जाती है। ठीक वैसे ही मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली खेली जाती है। जिसका आयोजन आज मंगलवार की सुबह किया गया।

बता दें, यह आयोजन वाराणसी के पांच दिवसीय रंगोत्सव का हिस्सा है। जो परमभरी एकादशी से शुरू होकर होली तक चलता है। ऐसा कहा जाता है कि माता पार्वती का गौना कराकर अपने धाम में लौटे बाबा विश्वनाथ अपने गणों और भूत प्रेत के साथ जलती चिताओं की भस्म की होली खेली जाती है। 

मसाननाथ बाबा की शोभायात्रा

बता दें, आज मणिकर्णिका घाट पर मसाननाथ बाबा की पालकी शोभायात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में धुनी रमाए नागा साधु, सन्यासी और वैरागी शामिल हुए। इसके बाद यह शोभायात्रा रमनाल इलाके से शुरू हुई औऱ मसाननाथ मंदिर तक पहुंची।

मंदिर पहुंचने के बाद चिता भस्म की होली खेली गई। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चिता भस्म की होली एक विशेष परंपरा है। लेकिन इसमें सिर्फ नागा साधु, सन्यासी और वैरागी ही शामिल होते हैं। 

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

मणिकर्णिका घाट की मसान की होली वाराणसी की एक अनूठी और सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है। जो वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है। ऐसे में मसान की होली का आयोजन सिर्फ वहां के स्थानीय लोगों के लिए नहीं, बल्कि बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को खूब लुभाता है।

मणिकर्णिका घाट पर मसान की होली के आयोजन के चलते सभी लोग बोट से सीधे मणिकर्णिका घाट पर पहुंच रहे है। ऐसे में भारी भीड़ को देखते हुए मणिकर्णिका घाट पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। घाट की तरफ जाने वाले रास्तों पर भी जवानों की तैनाती की गई हैं। दूसरी तरफ, मसान होली में डीजे बजाने पर रोक लगाई गई थी।

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