
UP ATS: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हाल ही में धार्मिक आयोजन के तहत 12लोगों ने इस्लाम छोड़कर पुनः हिंदू धर्म में वापसी की। लेकिन इस बीच, राज्य के बलरामपुर जिले में रहने वाला जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। यूपी पुलिस की आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने छांगुर बाबा और उसके गिरोह के खिलाफ बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। जिसमें धर्मांतरण, लैंड जिहाद, मनी लॉन्ड्रिंग, और लव जिहाद जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, छांगुर बाबा पर हर जाति की लड़कियों को धर्म परिवर्तन के लिए लालच देता और उसका एक निश्चित 'रेट' तय करता।
कौन है छांगुर बाबा?
जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा उतरौला, बलरामपुर का मौलाना है। वह कथित तौर पर एक अस्पताल निर्माण परियोजना से जुड़ा है, जो मधुपुर में बन रहा है। इस अस्पताल को शुरू में गौशाला के लिए निर्धारित जमीन पर बनाया जा रहा है, और इसे विदेशी फंडिंग से जोड़ा गया है। छांगुर बाबा पर आरोप है कि वह इस अस्पताल को धर्मांतरण के अड्डे के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। वह कथित तौर पर गरीब और कमजोर वर्गों, खासकर अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की लड़कियों और परिवारों को निशाना बनाता था।
छांगुर बाबा अपने गिरोह के साथ मिलकर संगठित तरीके से धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजाम देता था। उसने कथित तौर पर हर जाति की लड़कियों के लिए अलग-अलग 'रेट' तय किए थे। जिसके आधार पर उन्हें लालच देकर या डराकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता था। इन रेट्स में आर्थिक मदद, नौकरी या अन्य प्रलोभन शामिल थे।
यूपी ATS की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश ATS ने जून 2025में मधुपुर गांव में उसके अस्पताल और धर्मांतरण गतिविधियों की शिकायतें सामने आने के बाद छांगुर बाबा के खिलाफ जांच शुरू की। ATS ने छांगुर बाबा के दो सहयोगियों, जमालुद्दीन और महबूब मियां, को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन छांगुर बाबा फरार है। ATS ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की और कई सबूत बरामद किए। जिनमें विदेशी फंडिंग के दस्तावेज और धर्मांतरण से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।
पुलिस को शक है कि छांगुर बाबा का गिरोह विदेशी फंडिंग के जरिए संचालित हो रहा था, जिसमें खाड़ी देशों से भारी मात्रा में धन आ रहा था। यह गिरोह कथित तौर पर अनुसूचित जाति के मजदूरों और गरीब परिवारों को निशाना बनाता था, उन्हें पैसे, नौकरी, या जमीन का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करता था। अगर कोई इसका विरोध करता, तो उसके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जाते थे।
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