Basti Accident: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के गौर थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में चौकीदार राजेश कुमार और उनकी दो मासूम बेटियों की मौत हो गई। रामापुर-कोठवा गांव में पशु आहार से लदा एक ट्रक बाइक सवारों पर पलट गया, जिससे तीनों ट्रक के नीचे दब गए। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिवार में कोहराम मचा है।
जानकारी के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब पशु आहार से लदा ट्रक पलटकर बाइक सवारों के ऊपर जा गिरा। ट्रक के नीचे दबने से राजेश कुमार और उनकी दोनों बेटियों की जान चली गई। घटना की जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य में जुट गए।
ग्रामीणों ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद पुलिस की ओर से समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आरोप यह भी है कि घटनास्थल पर पहुंची गौर पुलिस ट्रक को देखकर वापस लौट गई थी। इसके बाद भोर में ग्रामीणों की ओर से दोबारा सूचना दिए जाने पर पुलिस के पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों की मदद से निकाले गए शव
घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने ट्रक के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। हादसे में तीन लोगों की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं और घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
हादसे के बाद एसडीएम हर्रैया, गौर थाना प्रभारी और पैकोलिया थाना पुलिस मौके पर मौजूद रहे। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों ने हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में हुई कथित देरी को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं, इतनी गंभीर घटना के बावजूद सीओ हर्रैया स्वर्णिमा सिंह के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हादसे ने खड़े किए कई सवाल
रामापुर-कोठवा गांव में हुए इस हादसे ने सड़क सुरक्षा, आपातकालीन सहायता और पुलिस की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर मदद मिलती तो शायद किसी की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, समय पर सहायता मिलने की स्थिति में जान बच सकती थी या नहीं, यह जांच के तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।