
नई दिल्ली:भारत एक ऐसा देश है जिसमें हर धर्म,जाति के लोग रहते है। अलग-अलग धर्म-जाति के लोग अपने अलग ढंग से रीति-रिवाज और त्योहार मनाते है। ऐसे में राजस्थान का एक त्योहार है जो भारत के किसी भी कोने में नहीं मनाया जाता है। यानी कि उस त्योहार को इस ढंग से मनाया जाता है कि भारत के किसी राज्य में नहीं मनाया जाता है। दरअसल हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाएं भगवान को खुश करने के लिए पूजा-व्रत करती है और ज्यादातर भगवान शिव को ज्यादा पूजा जाता है। शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत करती है।
वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे पति की कामना के लिए भगवान शिव की पूजा-व्रत करती है। जिसमें उनकी मनोकामना पूजा होता है। बता दें कि भगवान शिव के अनेको नाम है जिसमें से अक नाम है गणगौर। गण का मतलब शिव और गौर का मतलब गौरी यानी भगवान शिव की प्यारी पत्नी गौरी। इसी नाम से मिलता-जूलता नाम धींगा गवर त्योहार है। जो राजस्थान के जोधपूर में मनाया जाता है। धींगा गवर की पूजा 16 दिनों तक चलती है। इस व्रत को कुंवारी लड़कियां और शादीशुदा महिलाएं दोनों रखती है। शिव और गौर के इस पर्व में कुंवारी लड़कियां मनपसंद वर पाने की कामना करती हैं।
वहीं विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। इस पर्व को चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। जिसमें गणगौर की पूजा और व्रत किया जाता है। लेकिन इस पर्व को जोधपुर में दो अलग-अलग नाम से मनाने की परम्परा चली आ रही है। पहले पखवाड़े में पूजे जाने वाली गणगौर घुड़ला गवर कहलाती है। जबकि दूसरे पखवाड़े में धींगा गवर का पूजन होता है। पखवाड़े में गवर का पूजन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से आरंभ होकर चैत्र शुक्ल तीज तक किया जाता है। वहीं गणगौर का त्यौहार हाल ही में संपन्न हुआ है। धींगा गवर को गौरी मां की पूजा जाती है।
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