क्या है टू फिंगर टेस्ट, जानें कैसे किया जाता है वर्जिनिटी टेस्ट

क्या है टू फिंगर टेस्ट, जानें कैसे किया जाता है वर्जिनिटी टेस्ट

नई दिल्ली: देश में लगातार अपराध के मामले बढ़ते जा रहे है। आए दिन देश में छोटे बच्चे और महिलाएं अपराध का शिकार हो रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आए दिन सवाल खड़े हो रहे है। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर दिन 409 बच्चे अपराध का शिकार होते हैं। वहीं 2021 में आए एक आकड़े के अनुसार 1,49,404 बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामले दर्ज किए गए है। ऐसे में अब डॉक्टरों के इलाज पर भी सवाल खड़े हो रहे है। जिसमें रेप में इस्तेमाल होने वाला टू फिंगर टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

बता दें, आज यानि 31 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में बलात्कार का एक मामला सामने आया जिसमें डॉक्टरी जांच पर सवाल खड़ा किया गए है। ऐसे में रेप मामलों में होने वाली जांच के लिए  “टू-फिंगर टेस्ट” किया जाता था। जिसपर कोर्ट ने तत्काल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने वालों को दोषी माना जाएगा। वहीं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अफसोस जताया कि ‘टू फिंगर टेस्ट’ आज भी किया जा रहा है।

क्या होता है टू-फिंगर टेस्ट

यहां एक प्रकार का टेस्ट होता है। जिसमें रेप पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में एक या दो उंगली डालकर उसकी वर्जिनिटी टेस्टं की जाती है। यह टेस्ट इसलिए किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि महिला के साथ शारीरिक संबंध बने थे या नहीं। अगर प्राइवेट पार्ट में आसानी से दोनों उंगलियां चली जाती हैं तो महिला को सेक्चुरली एक्टिव माना जाता है और इसे ही महिला के वर्जिन या वर्जिन न होने का भी सबूत मान लिया जाता है। इस तरह का टेस्ट अभी भी कराया जा रहा है।

बैन के बावजूद होता रहा टेस्ट

सुप्रीम कोर्ट के बैन के बाद भी शर्मिंदा करने वाला यह टू-फिंगर टेस्ट होता रहा है। 2019 में ही करीब 1500 दुष्कर्म पीड़िता और उनके परिजनों ने कोर्ट में शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद यह टेस्ट हो रहा है। याचिका में टेस्ट को करने वाले डॉक्टरों का लाइसेंस रद करने की मांग की गई थी।

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