Tiger Shroff Firing Case : मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर 18 अक्टूबर 2026 को हुई फायरिंग के मामले में पुलिस की जांच अब कथित फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और विदेश में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचने पर केंद्रित है। शुरुआती जांच में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अनिल पंडित नाम के कथित गैंग ऑपरेटिव और उसके नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
तीनों शूटर्स को कैसे मिलते थे पैसे?
पैसे और विदेश में बसाने का लालच: पुलिस से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों को करीब ₹35,000 देने और विदेश में बसाने का वादा किए जाने की बात सामने आई है।
कथित हैंडलर से संपर्क: जांच में समीर नाम के एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी की खबर है। उस पर शूटर्स का संपर्क अमेरिका में मौजूद बताए जा रहे अनिल पंडित से कराने का आरोप है।
फंडिंग की पूरी कड़ी अभी स्पष्ट नहीं: किसने वास्तव में पैसे दिए, रकम किस माध्यम से पहुंची और इसके पीछे अन्य फाइनेंसर थे या नहीं—इन सवालों की जांच जारी है।
हथियार कैसे मिले?
नवभारत टाइम्स की 20 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों को हथियार सीधे किसी व्यक्ति ने हाथ में देकर नहीं सौंपे थे। उन्हें मैसेज के जरिए बताया गया कि हथियार कहां रखे गए हैं। इसके बाद उन्हें वहां से हथियार उठाने को कहा गया।
जांच के अन्य अहम पहलू:
- पुलिस को घटनास्थल से पाँच खाली कारतूस और दो जिंदा कारतूस मिलने की शुरुआती जानकारी सामने आई।
- शुरुआती जांच में हथियार में तकनीकी खराबी की आशंका भी जताई गई।
- हथियारों की सप्लाई किसने की और उनका मूल स्रोत क्या था, इसकी पुष्टि जांच से होनी बाकी है।
इन जानकारियों का आधार मीडिया में प्रकाशित पुलिस-जांच संबंधी रिपोर्टें हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि अभी मानकर नहीं चलना चाहिए।
क्या लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ है?
जांच में कथित गैंग नेटवर्क और अमेरिका में मौजूद बताए जा रहे अनिल पंडित की भूमिका की पड़ताल हो रही है। इस मामले में गैंग से जुड़े होने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, फंडिंग से लेकर हथियारों की सप्लाई तक पूरी श्रृंखला और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका को जांच एजेंसियों द्वारा प्रमाणित किया जाना बाकी है।
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