मंकीपॉक्स को लेकर डरा रही है WHO की ये रिपोर्ट

मंकीपॉक्स को लेकर डरा रही है WHO की ये रिपोर्ट

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के बाद मंकीपॉक्स ने दुनिया को डराना शुरू कर दिया है। बता दें कि मंकीपॉक्स ने 50 से ज्यादा देशों में अपने पैर पसार लिए है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की मानें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में मंकीपॉक्स के 14,000 मामलों की पुष्टि की है। अफ्रीका में 5 मृत्यु की सूचना आई है। रॉयटर्स ने WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस के हवाले से बताया गया है कि मंकीपॉक्स धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। बता दें कि भारत में भी इस वायरस के 2 मामोलं की पुष्टि हुई है। जो केरल से सामने आए है।

वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंकीपॉक्स से बचने के लिए दिशा-निर्देशों जारी किए है। जारि किए हुए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क से बचना चाहिए, मृत या जीवित जंगली जानवरों और अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। दिशानिर्देश अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को जंगली खेल (बुशमीट) से मांस खाने या तैयार करने या अफ्रीका से जंगली जानवरों से प्राप्त उत्पादों (क्रीम, लोशन, पाउडर) का उपयोग करने की सलाह भी देते हैं।

मंत्रालय के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को बीमार लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली दूषित सामग्री जैसे कपड़े, बिस्तर या स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स में उपयोग की जाने वाली सामग्री या संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से भी बचना चाहिए।

क्या है मंकीपॉक्स

मंकीपॉक्स एक चिकनपॉक्स की तरह का वायरस है लेकिन इसमें अलग तरह का वायरल संक्रमण होता है। ये सबसे पहले साल 1958 में कैद हुए एक बंदर में पाया गया था। साल 1970 में ये पहली बार ये किसी इंसान में पाया गया। ये वायरस मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के वर्षा वन इलाकों में पाया जाता है।

मंकीपॉक्स के लक्षण

•             मंक्सीपॉक्स के होने पर सपाट त्वचा का रंग बदलने लगता है

•             त्वचा पर लाल निशान और गांठें पड़ सकती हैं।

•             सफेद पस से भरे फफोले शरीर पर पड़ सकते हैं जोकि चिकन पॉक्स की तरह दिखाई देते हैं।

•             संक्रमण की रफ्तार कम होने पर फफोले सूखने लगते हैं और 21 दिन बाद खत्म हो जाते हैं।

•             मंकीपॉक्स चेहरे से फैलना शुरू होता है। फिर बाहों, हाथों, पैरों और जननांग समेत शरीर के बाकी हिस्सों में फैलता है।

मंकीपॉक्स का इलाज

मंकीपॉक्सके लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट उपचार की सिफारिश नहीं की गई है। हालांकि चेचक के खिलाफ टीकाकरण रोग को रोकने में लगभग 85 प्रतिशत प्रभावी पाया गया है इसलिए, यह मंकीपॉक्स के गंभीर लक्षणों को रोकने के लिए बचपन में चेचक के टीकाकरण की सिफारिश करता है।

भारत में सरकार द्वारा नई गाइडलाइनस जारी

•             संक्रामक अवधि के दौरान रोगी को 21 दिनों की तक लोगों से दूरी बनाए।

•             मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने पर लैब में टेस्टिंग करवाए।

•             मंकीपॉक्स के लिए पीसीआर या डीएनए टेस्टिंग ही मान्य होगी।

•             रोगी अपनी देखभाल, डायग्नोसिस, केस मैनेजमेंट आदि पर ध्यान दें।

•             रोगी को अपने ओर उनके सपंर्क में आए कपड़ों से भी दूरी बनाए रखें।

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