
नई दिल्ली: भगवान गणेश को समर्पित त्योहार गणेश चतुर्थी का आने ही वाला है और अब इस त्योहार की तैयारियां जोरों पर है। हर साल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन गणेश जी का जन्म दिवस है, इसलिए इसे गणेश जयंती भी कहते हैं। विशेष रूप से यह त्योहार महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का महापर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
बता दे कि, इस वर्ष गणेश चतुर्थी 31 अगस्त से प्रारंभ हो रही है। यह 10 दिनों का उत्सव होता है। लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति स्थापना करते हैं, विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और फिर एक निश्चित समय पर उनका विसर्जन कर देते हैं। जो लोग 10 दिनों के लिए बप्पा को घर पर स्थापित करते हैं, वे गणेश चतुर्दशी को उनका विसर्जन करते हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर तीन शुभ योग बन रहे हैं और एक विशेष संयोग बन रहा है।
गणेश चतुर्थी के 3 शुभ योग
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, इस वर्ष की चतुर्थी तिथि रवि योग में है। इसके अलावा दो शुभ योग ब्रह्म और शुक्ल योग भी बन रहे हैं। 31 अगस्त को रवि योग प्रात: 05:58 बजे से लेकर देर रात 12:12 बजे तक है। वहीं शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर रात 10:48 बजे तक है। उसके बाद से ब्रह्म योग प्रारंभ हो जाएगा। ये तीनों ही योग पूजा पाठ की दृष्टि से शुभ माने जाते हैं।
गणेश चतुर्थी पर बुधवार का विशेष संयोग
इस बार गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को बुधवार के दिन पड़ रही है। बुधवार के दिन वैसे भी गणेश जी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब गणेश जी का जन्म हुआ था, तब उस समय कैलाश पर बुध देव भी थे। बुध देव के होने की वजह से बुधवार की पूजा के लिए प्रतिनिधि देव गणेश जी हो गए। ऐसे में देखा जाए तो रवि योग अमंगल को दूर करके सफलता प्रदान करता है. इसमें सूर्य की स्थिति प्रबल मानी जाती है। गणेश चतुर्थी पर आप बप्पा को प्रसन्न करके अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण सफल बना सकते हैं।
गणेश चतुर्थी के शुभ योग
पहला दिन:रवि योग, प्रात: 05:58बजे से लेकर देर रात 12:12बजे तक
दूसरा दिन:रवि योग, 12:12एएम से सुबह 05:59बजे तक
तीसरा दिन:सर्वार्थ सिद्धि योग, रात 11:47बजे से अगले दिन सुबह 06:00बजे तक, रवि योग: सुबह 05:59बजे से रात 11:47बजे तक
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