MLC Election : बिहार में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों के लिए आज मतदान जारी है। शिक्षक और स्नातक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। इसी बीच मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है।मीडिया से बात करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि इस बार वे रसगुल्ला नहीं बनवा रहे हैं।
'ई रसगुल्ला वाला इलेक्शन नहीं है'
दरअसल, जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या इस बार भी रसगुल्ला बनवाया गया है, तो इसका जवाब देते हुए विधायक ने कहा, 'ई रसगुल्ला वाला इलेक्शन नहीं है।'क्या है रसगुल्ला वाला बयान?गौरतलब है कि बिहार में चुनाव के दौरान रसगुल्ला वाला बयान अनंत सिंह की पहचान बन गया है। पिछले चुनावों में अनंत सिंह अक्सर कहते थे कि उन्होंने हजारों किलो रसगुल्ला बनवा रखा है, जीत के बाद सबको खिलाएंगे। उनके इस बयान के काफी मायने निकाले जाते थे। लेकिन इस बार MLC चुनाव को उन्होंने रसगुल्ला वाला चुनाव मानने से इनकार कर दिया।अनंत सिंह ने कहा कि यह शिक्षक और स्नातक का चुनाव है, इसमें जनता ही तय करेगी।
नीतीश कुमार को बताया गुरु -
जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के घर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जाने के सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें जहां ले जाया जाता है, वहां वे जाते हैं। नीतीश कुमार हमारे गुरु जी हैं।अनंत सिंह ने कहा, “नीतीश कुमार को जो जहां ले जाता है, वे वहां चले जाते हैं। वे सबके हैं। नीतीश कुमार हमारे गुरु जी हैं और हम उनका सम्मान करते हैं।”अनंत सिंह के इस बयान के भी सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि अनंत सिंह ने इशारों-इशारों में कह दिया कि नीतीश कुमार को किसी खास उम्मीदवार के घर ले जाया गया है।जनता ही असली मालिकअनंत सिंह ने आगे कहा कि लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक है। उन्हें उम्मीद है कि उनके उम्मीदवार की जीत होगी।
अगर कोई गलत करेगा तो जनता जवाब देगी-
गड़बड़ी से जुड़े सवाल पर विधायक ने कहा कि अगर कोई गलत करेगा तो जनता जवाब देगी। उन्हें उम्मीद है कि कोई गड़बड़ी नहीं होगी और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होगा।बता दें कि विधान परिषद की इन आठ सीटों पर शिक्षक और स्नातक वोटर ही मतदान करते हैं। इस चुनाव में जेडीयू, आरजेडी और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। सभी पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मतगणना के बाद ही साफ होगा कि शिक्षकों और स्नातकों ने किसके सिर पर जीत का ताज पहनाया है।