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दिल्ली के सबसे बड़े ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत! मुकरबा चौक और ट्रांसपोर्ट नगर के लिए बड़े प्रोजेक्ट मंजूर

दिल्ली के सबसे बड़े ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत! मुकरबा चौक और ट्रांसपोर्ट नगर के लिए बड़े प्रोजेक्ट मंजूर

Delhi Traffic News: दिल्ली वालों के लिए ट्रैफिक जाम से राहत की बड़ी खबर सामने आई है। राजधानी के सबसे व्यस्त और जाम वाले इलाकों में शामिल मुकरबा चौक, आउटर रिंग रोड और संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि भारतीय रेलवे ने नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है।

ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

इन प्रोजेक्ट्स में हैदरपुर बादली रेलवे ओवरब्रिज को चौड़ा करना और शालीमार बाग को संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से जोड़ने वाला एलिवेटेड लूप बनाना शामिल है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद लाखों लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। मुकरबा चौक दिल्ली के सबसे बदनाम ट्रैफिक पॉइंट्स में गिना जाता है। यहां हर दिन हजारों ट्रक, कंटेनर, बसें और निजी वाहन गुजरते हैं। सुबह और शाम के समय हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में घंटों लग जाते हैं।

इस क्षेत्र में आते हैं देशभर से भारी वाहन

संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर एशिया के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब्स में शामिल है। यहां देशभर से भारी वाहन आते हैं, जिससे आउटर रिंग रोड और आसपास के इलाकों पर लगातार दबाव बना रहता है। ऐसे में नया एलिवेटेड लूप और चौड़ा ओवरब्रिज ट्रैफिक को काफी हद तक आसान बना सकते हैं। सरकार के अनुसार, हैदरपुर बादली रेलवे ओवरब्रिज चौड़ा होने से भारी वाहनों की आवाजाही तेज होगी। वहीं शालीमार बाग से ट्रांसपोर्ट नगर तक बनने वाला एलिवेटेड लूप रेलवे ट्रैक के ऊपर से होकर सीधे कनेक्टिविटी देगा। इससे वाहनों को जाम और रेलवे क्रॉसिंग पर रुकना नहीं पड़ेगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा फायदा मुकरबा चौक, शालीमार बाग, पीतमपुरा, मॉडल टाउन, आजादपुर, वजीरपुर, केशवपुरम और संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर जैसे इलाकों को मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैफिक जाम सिर्फ लोगों का समय ही खराब नहीं करता बल्कि इससे ईंधन की भी भारी बर्बादी होती है। रोजाना हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल जाम में फंसकर खर्च हो जाता है। इससे प्रदूषण और ट्रांसपोर्ट लागत दोनों बढ़ते हैं।

रेलवे ने तकनीकी जांच के बाद इन प्रोजेक्ट्स को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि निर्माण कार्य कितनी तेजी से पूरा होता है और जमीन पर बदलाव कब दिखाई देता है।

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