मंगल पर भी लगता है सूर्य ग्रहण, जानें कैसे

मंगल पर भी लगता है सूर्य ग्रहण, जानें कैसे

नई दिल्ली: हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह है। बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेप्चून। इसमें पृथवी ही एक ऐसा ग्रह है, जिस पर जीवन है। हवा, पानी, जीने के लिए सब जो जरुरी होता है। इसी बीच हमारे साइंटिस्ट(वैज्ञानिक) लगातार नए की खोज में लगे है। सूर्य ग्रहण तो अपने सुना ही होगा इसको लेकर लोग आज भी बहुत उत्सुक रहते है। सूर्य ग्रहण वाले दिन लोग चश्मे की मदद से इसे देखते हैं। अपने पृथ्वी पर तो अनेक सूर्य ग्रहण देखे होगे, लेकिन अगर हम बात करें मंगल ग्रह कि, तो नासा ने मंगल पर सूर्य ग्रहण की वीडियो जारी कर लोगों को चौका दिया है।

 पृथ्वी से चंद्रमा और सूर्य का आकार लगभग एक सा दिखाई देते है। इसमें पृथ्वी पर सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) भी बहुत अनोखा होता है। जिसमें चंद्रमा सूर्य को ठीक तरह से ढक लेता है। मंगल ग्रह और उसके चंद्रमाओं(Moons of Mars),फोबोस और डीमोस की वजह से भी सूर्य ग्रहण लगते हैं। नासा ने मंगल पर हुए सूर्य ग्रहण को रिकॉर्ड किया है। नासा (NASA) के परसेवरेंस रोवर (Perseverance rover) ने मंगल ग्रह के आलू की आकृति के चांद फोबोस (Phobos) को सूर्य के आगे से गुजरते हुए रिकॉर्ड किया है। फरवरी 2021 में परसेवरेंस रोवर को मंगल ग्रह पर भेजा गया था। 2 अप्रैल को रोवर ने नेक्स्ट जेनरेशन मास्टकैम-Z कैमरे से इस घटना को रिकॉर्ड किया।

साइंटिस्ट ने बताया कि, "मुझे यह पता था कि ये अच्छा होगा, लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी,कि यह इतना आश्चर्यजनक होगा।" मंगल ग्रह के दो चांद में से फोबोस सबसे बड़ा है। ये दिन में तीन बार मंगल ग्रह की परिक्रमा करता है। ग्रह की सतह के ये बेहद करीब है,इसी कारण कई बार यह मंगल की कई जगहों से दिखाई नहीं देता है।

मंगल पर 40सेकंड तक चला सूर्य ग्रहण
परसेवरेंस रोवर के मंगल पर उतरने के 397वें दिन ये ग्रहण हुआ जो 40 सेकंड से थोड़ा ज्याद समय तक चला। यह पृथ्वी पर होने वाले सूर्य ग्रहण से बहुत छोटा था, जो आश्चर्य की बात है, क्योंकि फोबोस पृथ्वी के चंद्रमा से लगभग 157 गुना छोटा है। मंगल के चंद्र ग्रहण की तस्वीरें पहले भी ली गई हैं। इससे पहले स्पिरिट, ऑपरच्यूनिटी और क्यूरियोसिटी ने भी मंगल पर सूर्य ग्रहण की तस्वीरें खींची थीं। लेकिन परसेवरेंस रोवर का फुटेज सूर्य ग्रहण से जुड़ी सबसे जूम वीडियो है। इसके साथ ही परसेवरेंस रोवर के जरिए ही पहली बार सूर्यग्रहण की रंगीन तस्वीरें देखी गई थी।   

 

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