विश्व का एकलौता मंदिर, जहां श्मशान में विराजमान हैं भगवान गणेश

विश्व का एकलौता मंदिर, जहां श्मशान में विराजमान हैं भगवान गणेश

Lord Ganesh Mandir: भगवान गणेश जिनकी पूजा अर्चना करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। देश में भगवान गणेश के कई सारे मंदिर भी हैं। लेकिन कुछ मंदिर ऐसे है जिसके रहस्य विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है। ऐसा ही एक मंदिर धार्मिक नगरी उज्जैन में है। ये मंदिर श्मशान घाट में स्थित है। इस तरह का मंदिर पूरी दुनिया में कहीं और नहीं है। दरअसल, महाकाल की नगरी के नाम से मशहूर उज्जैन की गिनती उन तीर्थ स्थलों में की जाती है जिसकी श्रेष्ठता स्वर्ग से भी बढ़कर है। इसी नगरी में भगवान गणेश का एक मंदिर है जो इस नगरी के चक्रतीर्थ शमशान में स्थित है।

ये पूरी दुनिया का इकलौता मंदिर है जो दसभुजा नाम से प्रसिद्ध है। इस 10 भुजाओं वाली प्रतिमा में भगवान श्गणेश के हाथों में अलग-अलग 10 शक्तियां हैं। इसके साथ ही वह अपनी गोद में पुत्री माता संतोषी को लेकर बैठे हैं और आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं। स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में इस मंदिर का वर्णन है।  यहां की मान्यता है कि मन्नत पूरी करने के लिए भक्त गणेश जी की उल्टी परिक्रमा लगाते हैं। और जब मन्नत हो जाती है तो सीधी परिक्रमा लगाई जाती है। यहां पर मन्नत का धागा भी बांधा जाता है। यही नहीं मंदिर में अनेकों श्रद्धालु अपनी मनोकामना को लेकर उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं।

पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

ऐसा कहा जाता है कि उल्टा स्वस्तिक बनाकर कार्य पूर्णता के लिए मनोकामना मांगी जाती है। इस मंदिर में हर बुधवार कों विभिन्न तरह के श्रृंगार होते है, जिसे देखने के लिए देश विदेश से भी श्रद्धालु आते है। इस मंदिर के बारे में ये भी कहा जाता है कि अगर कोई भक्त 5 बुधवार, इस मंदिर में गणपति जी के दर्शन करता है और मनोकामनाएं मांगता है तो वह पूरी होती है। चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर सिद्धियों की प्राप्ति के लिए तांत्रिकों द्वारा अनेक अनुष्ठान भी किए जाते हैं। तांत्रिक श्मशान घाट पर सिद्धियों को प्राप्त करते हैं लेकिन इन सिद्धियों की पूर्णता भगवान गणेश के दर्शनों के बाद ही होती है।

कैसे हुई इस मंदिर की स्थापना  

मंदिर के पुजारी के अनुसार, भगवान मंगल ने ही 10 भुजाधारी गणेश की स्थापना की थी और इस मंदिर पर उन्होंने 14 सालों तक तपस्या भी की थी। पुराणों में उल्लेख है कि 10 भुजाधारी गणेश की तपस्या से उन्हें भगवान अंगारेश्वर की तपस्या करने का मिला था। जहां 16 सालों तक तपस्या करने के बाद भगवान अंगारेश्वर ने उन्हें शिवलिंग के रूप मे मंगलनाथ मंदिर में स्थापित होने का आशीर्वाद दिया था। यहां से वह जनकल्याण कर जन-जन की पीड़ा दूर कर रहे हैं। भक्तों के अनुसार ये मंदिर अति चमत्कारी है और दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर होते हैं।

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