
Tamil Nadu Govt Replaces Rupee Symbol: तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार ने भाषा विवाद के बीच गुरुवार को रुपये के सिंबल '₹' को तमिल अक्षर 'ரூ' से बदल दिया। जिसपर उत्तर से लेकर दक्षिण तक विवाद छिड़ गया है।
तमिलनाडु सरकार के इस कदम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या कोई राज्य सरकार रुपये के सिंबल को बदल सकती है। क्या किसी राज्य के पास ये फैसला लेने के लिए पर्याप्त शक्तियां मौजूद हैं? संविधान में इसे लेकर क्या कुछ कहा गया है? आइए आपको बताते हैं।
क्या है राज्य सरकार का अधिकार?
आपको यह जानकार यह हैरानी होगी कि देश में किसी राज्य द्वारा इस तरह से रुपये का सिंबल बदलने का यह पहला मामला है। तमिलनाडु पहला राज्य है जिसने रुपये का सिंबल बदलने का फैसला लिया है। इससे पहले अभी तक किसी भी और राज्य ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।
बता दें कि केंद्र की ओर से रुपये के सिंबल में बदलाव करने को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं। इसलिए ये साफतौर पर नहीं कहा जा सकता कि तमिलनाडु की स्टानिल सरकार ने रुपये का सिंबल बदलने का जो ये फैसला लिया है वो किसी कानून का उल्लंघन के अंतर्गत आता हैं।
रुपये के सिंबल को राष्ट्रीय चिह्न की मान्यता नहीं
वहीं, रुपये के सिंबल को राष्ट्रीय चिन्ह की मान्यता नहीं मिली है। इस वजह से इसके सिंबल में किसी भी तरह के बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास रहता है। हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय चिन्ह के गलत इस्तेमाल की रोकथाम के लिए (एक्ट) 2005बना हुआ है। इसमें समय-समय पर संशोधन भी होते रहे हैं। केंद्र सरकार के पास ये शक्तियां व्यापत है कि वो जरुरत पड़ने पर केवल राष्ट्रीय प्रतीकों के डिजाइन में बदलाव कर सकती है।
हालांकि, इसे लेकर संविधान के जानकारों की राय भिन्न है। कुछ का मानना है कि केंद्र सरकार के पास राष्ट्रीय चिन्ह में बदलाव करने का पूरा अधिकार है। वहीं, कुछ जानकारों का ये भी मानना है कि केंद्र सरकार के पास राष्ट्रीय चिन्ह के डिजाइन में बदलाव करने के साथ-साथ साथ पूरा राष्ट्रीय चिन्ह भी बदलने का अधिकार है।
2010में मिली थी स्वीकायर्ता
बता दें रुपये के जिस सिंबल को लेकर ये पूरा विवाद खड़ा हुआ है उसे तत्कालीन यूपीए सरकार ने 15 जुलाई, 2010 को स्वीकार किया था। रुपये के सिंबल को आईआईटी बॉम्बे के छात्र डी. उदय कुमार ने डिजाइन किया था। डी. उदय कुमार के पिता डीएमके के पूर्व विधायक रह चुके हैं।
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